मां के गहने गिरवी रख शुरू किया था कारोबार, आज चार जिलों में फैला प्यापार
Success story of Sitaram Patel from Khandwa : कहते हैं, किसी चीज को अगर पाने की ठान लो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती है, इस बात को मध्य प्रदेश के खंडवा के सीताराम पटेल ने सच कर दिखाया है। सीताराम की जिंदगी बहुत ही गरीबी और आर्थिक तंगी से गुजरी। कभी मजदूरी कर घर खर्च चला रहे थे। फिर छोटी-मोटी दुकानों में ही नौकरी करने लगे। इससे भी घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। लेकिन सीताराम के पास कोई विकल्प नहीं थी। कोई बिजनेस शुरू करने के लिए पूंजी की जरूरत थी, जो सीताराम के पास नहीं थी। सीताराम ने हिम्मत नहीं हारी और अपने साहस और संघर्ष के दम पर वह कर दिखाया जो हर किसी के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।
खंडवा के आब्दु गांव के सीताराम पटेल की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सपने देखता है। गरीबी में पले-बढ़े सीताराम ने बचपन में खेती और छोटी-मोटी नौकरियां कीं। कभी 150 रुपए महीने की मेडिकल दुकान की नौकरी, तो कभी मोबाइल रिपेयरिंग, लेकिन उनका सपना था कुछ बड़ा करने का।
मां ने अपने गहने गिरवी रखकर अपने बेटे सीताराम के सपने को पंख दिए। इस पूंजी से सीताराम ने “श्री दादाजी मोबाइल” और “एचडीएम सेल्स” शुरू किया। शुरुआत में अनुभव की कमी और बाजार की चुनौतियों ने रास्ता रोका, लेकिन उनकी ईमानदारी और मेहनत ने ग्राहकों का भरोसा जीता। आज उनका कारोबार मोबाइल एजेंसी, रिटेल, बाटा शोरूम, सफल सीट्स और वेयरहाउस तक फैला है, जो खंडवा सहित चार जिलों में मशहूर है।
सीताराम कहते हैं, “मां का आशीर्वाद और ग्राहकों का भरोसा मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।” वे युवाओं को सलाह देते हैं कि धैर्य और ईमानदारी से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। आज वे कई युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं।
संघर्षों के सागर में डूबे सीताराम
जानकारी के मुताबिक, सीताराम का बचपन बेहद संघर्ष के साथ गुजरा। परिवार खेती-किसानी से जुड़ा था, लेकिन आमदनी इतनी नहीं थी कि घर का खर्च आसानी से चल सके। ऐसे में सीताराम ने पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-मोटे कामकाज करना शुरू कर दिया। कभी मजदूरी करते थे तो कभी मेडिकल की दुकान में काम करते थे, जहां उन्हें 150 रुपए महीना मिलते थे। इसी तरह कभी मोबाइल रिपेयर की दुकान में काम करने लगे। मेहनत से सीताराम कभी पीछे नहीं हटे।
मां के गहनों ने बना दिया बिजनेसमैन
नौकरी से सीताराम को संतोष नहीं मिल रहा था। ऐसे में सीताराम ने बिजनेस करने की ठानी, लेकिन यहां भी पूंजी नहीं थी। ऐसे में सीताराम की मां ने अपने गहने दिए। इन गहनों को बेचकर सीताराम ने मोबाइल रिपेयर का बिजनेस शुरू किया। इसी पूंजी से उन्होंने “श्री दादाजी मोबाइल” और “एचडीएम सेल्स” की नींव रखी। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दौर में सीताराम को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
अनुभव कम होने की वजह से उन्हें घाटा भी उठाना पड़ा। लेकिन सफलता उनका इंतजार कर रही थी। अपनी मेहनत के दम पर सीताराम का कारोबार धीरे-धीरे फैलने लगा। आज वे मोबाइल की एजेंसी के साथ-साथ रिटेल व्यापार, बाटा शोरूम, सफल सीट्स और सफल इंडस्ट्रीज के नाम से वेयरहाउस का कारोबार भी कर रहे हैं। महज कुछ ही लाखों रुपए से शुरू हुआ सीताराम का कारोबार आज करोडों रुपए तक पहुंच गया है, यह उनकी सफल रणनीति और विपरीत परिस्थिति में भी हार ना मानने के संकल्प को बताता है।
मध्य प्रदेश के 4 जिलों में फैला कारोबार
रिपोर्ट के मुताबिक, आज सीताराम का बिजनेस खंडवा समेत आसपास के चार जिलों तक फैला हुआ है। मोबाइल एजेंसी से लेकर बीज और वेयरहाउस तक, उनके कई कारोबार एक साथ चल रहे हैं। यह सब कुछ उन्होंने सिर्फ 20 साल के भीतर हासिल किया। सीताराम पहले कभी नौकरी और मजदूरी के लिए दर-दर भटक रहे थे। अब वो बड़े पैमाने पर युवाओं को रोजगार दे रहे हैं। सीताराम की कहानी सिर्फ व्यापार की सफलता नहीं, बल्कि सपनों को सच करने का जीता-जागता उदाहरण है।

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