डॉ. सौम्या स्वामीनाथन को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में से एक ‘रॉयल सोसाइटी’ का फेलो चुना गया है। इसी के साथ इस रॉयल क्लब में शामिल होने वाली सौम्या दूसरी भारतीय महिला बन गई हैं।
भारत को विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हाथ लगी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की पूर्व महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में से एक ‘रॉयल सोसाइटी’ (FRS) का फेलो चुना गया है। इसी के साथ इस रॉयल क्लब में शामिल होने वाली सौम्या दूसरी भारतीय महिला बन गई हैं। इस खबर की पुष्टि वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने की। डॉ. माशेलकर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के पूर्व महानिदेशक रहने के साथ-साथ कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विज्ञान अकादमियों के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
डॉ. सौम्या स्वामीनाथन के पिता भी रह चुके हैं इस क्लब में शामिल
डॉ. सौम्या स्वामीनाथन के पिता भारत रत्न प्रोफेसर एम. एस. स्वामीनाथन को भी इस क्लब में शामिल होने का गौरव प्राप्त है। प्रोफेसर एम. एस. स्वामीनाथन को देश में हरित क्रांति का जनक माना जाता है। इन्होंने भारत को खाद्यान्न संकट से उबारने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब उनकी बेटी ने वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान देकर परिवार और देश का मान बढ़ाया है।
रॉयल क्लब में सदस्यता हासिल करने वाले ये हैं पहली भारतीय महिला
रॉयल सोसाइटी का इतिहास लगभग 365 साल पुराना है। विज्ञान के क्षेत्र में इसे सबसे सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इस साढ़े तीन सौ साल से भी लंबे सफर में डॉ. सौम्या स्वामीनाथन यह गौरव हासिल करने वाली केवल दूसरी भारतीय महिला वैज्ञानिक बनी हैं। उनसे पहले यह मुकाम प्रोफेसर गगनदीप कंग ने हासिल किया था। गगनदीप कंग को साल 2019 में इस रॉयल क्लब में शामिल किया गया था।
डॉ. सौम्या के नाम कई कीर्तिमान
डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का करियर चिकित्सा अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से ट्यूबरकुलोसिस (TB) और क्लिनिकल रिसर्च में 30 से अधिक सालों का अनुभव हासिल किया है। WHO में मुख्य वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने दुनिया भर में स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देश तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, उन्होंने इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरकुलोसिस एंड लंग डिजीज के एचआईवी अनुभाग की उपाध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दीं। साथ ही. स्वास्थ्य के क्षेत्र में डिजिटल टेक्नोलॉजी व AI के उपयोग को बढ़ावा दिया।

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