April 17, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

‘2030 से पहले रिहाई संभव नहीं…’ बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम की अर्जी

 मुंबई

1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट और अन्य मामलों में सजा काट रहे अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने उसकी समय से पहले रिहाई की मांग को खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वह 2030 से पहले जेल से बाहर नहीं आ सकता। 

जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि सलेम की याचिका समय से पहले और आधारहीन है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 25 साल की सजा पूरी होने से पहले किसी तरह की रियायत या रिमिशन (छूट) पर विचार नहीं किया जा सकता। 

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह सजा पूरी होने से एक महीने पहले ही रिमिशन पर विचार करे. यानी सलेम के मामले में यह प्रक्रिया नवंबर 2030 के आसपास ही शुरू हो सकती है। 

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने सजा को 25 साल तक सीमित करते हुए किसी भी अतिरिक्त छूट का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है. इसलिए इससे पहले किसी तरह की राहत देना संभव नहीं है। 

अबू सलेम की दलील क्या थी?
अबू सलेम ने अपनी याचिका में कहा था कि वह 25 साल की सजा लगभग पूरी कर चुका है. उसने अपने अंडरट्रायल अवधि, सजा के बाद की जेल अवधि और जेल में मिली छूट (रिमिशन) को जोड़कर यह दावा किया था कि अब उसे रिहा किया जाना चाहिए. उसकी ओर से वकील फरहाना शाह ने कोर्ट में दलील दी। 

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने इस दलील का विरोध किया. उन्होंने कहा कि सलेम की याचिका समय से पहले दायर की गई है और इसमें कोई दम नहीं है. सरकार का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 25 साल की सजा का मतलब वास्तविक जेल में बिताया गया समय है, न कि वह अवधि जिसमें रिमिशन जोड़कर सजा कम की जाए। 

सीबीआई और जेल प्रशासन की ओर से भी इस याचिका का विरोध किया गया और कहा गया कि सलेम को कम से कम 25 साल जेल में रहना ही होगा. हाईकोर्ट ने सरकार और सीबीआई के तर्कों से सहमति जताई और कहा कि सलेम की याचिका पूरी तरह गलत आधार पर दायर की गई है. अदालत ने कहा कि रिमिशन को जोड़कर सजा की गणना करना इस मामले में लागू नहीं होता, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सजा को 25 साल की निश्चित अवधि में सीमित कर दिया है। 

कब तक जेल में रहेगा अबू सलेम?
अबू सलेम को पुर्तगाल से प्रत्यर्पण (Extradition) के जरिए नवंबर 2005 में भारत लाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्यर्पण समझौते के तहत उसकी उम्रकैद की सजा को 25 साल तक सीमित किया था. इस आधार पर देखा जाए तो सलेम की 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी. इसके बाद ही उसकी रिहाई या किसी तरह की राहत पर विचार किया जा सकता है. अबू सलेम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में दोषी है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे. इसके अलावा वह एक व्यवसायी प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी सजा काट रहा है। 

Spread the love