Smart TV Spying on You : एक नई स्टडी ने खुलासा किया है कि कुछ स्मार्ट टीवी हर 15 सेकंड में स्क्रीनशॉट लेकर कंपनियों को भेज रहे हैं। यह जासूसी ऑटोमैटिक कंटेंट रिकग्निशन (ACR) तकनीक के जरिए होती है, जो लैपटॉप और गेमिंग डेटा भी ट्रैक करती है। प्राइवेसी बचाने के लिए तुरंत अपने टीवी की सेटिंग्स में जाकर इसे बंद करें।
आज के स्मार्ट टीवी सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि ये आपकी हर गतिविधि पर नजर भी रख सकते हैं। एक नई स्टडी और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों ने इस बात को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है कि कहीं आपका टीवी आपकी निजी जानकारी इकट्ठा तो नहीं कर रहा। हाल ही में एक पियर-रिव्यूड स्टडी में सामने आया कि कई स्मार्ट टीवी आपके स्क्रीन के स्क्रीनशॉट लेते हैं और उन्हें कंपनी के सर्वर पर भेजते हैं।
स्टडी में क्या सामने आया
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्मार्ट टीवी मॉडल्स में यह प्रक्रिया हर 15 सेकंड में होती है, जबकि कुछ ब्रांड्स में यह हर मिनट हो सकता है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह ट्रैकिंग तब भी जारी रहती है जब आप टीवी को सिर्फ मॉनिटर की तरह इस्तेमाल कर रहे हों।
यूट्यूबर ने किया ये दावा
यूट्यूब पर लॉयल मोसेस नाम के एक क्रिएटर ने दावा किया कि स्मार्ट टीवी में ऑटोमैटिक कंटेंट रिकग्निशन (ACR) नाम का फीचर होता है, जो डिफॉल्ट रूप से ऑन रहता है। यह फीचर आपके टीवी स्क्रीन पर चल रही हर चीज, चाहे वो प्लेस्टेशन हो, लैपटॉप हो या केबल बॉक्स, सबको ट्रैक करता है। वीडियो में यह भी कहा गया कि यह डेटा कंपनियां आगे बेचती हैं और इससे आपकी पूरी डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जाती है।
क्या है ACR टेक्नोलॉजी
ऑटोमैटिक कंटेंट रिकग्निशन (ACR) एक ऐसी तकनीक है, जो स्क्रीन पर दिख रहे कंटेंट को पहचान लेती है। यह कुछ-कुछ Shazam ऐप की तरह काम करता है, जो गाने की पहचान कर लेता है। रिसर्च के अनुसार, यह सिस्टम छोटे-छोटे ऑडियो-वीडियो क्लिप्स को कैप्चर कर उनका “फिंगरप्रिंट” बनाता है और फिर उसे सर्वर पर भेजता है, जहां उसे डेटाबेस से मैच किया जाता है।
कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं
टेक कंपनियों का मुख्य मकसद है, आपकी पसंद-नापसंद को समझना। इस डेटा के जरिए कंपनियां आपको टारगेटेड विज्ञापन दिखाती हैं। यानी अगर आपने टीवी पर कुछ देखा, तो उसी से जुड़े विज्ञापन आपको मोबाइल या लैपटॉप पर भी दिख सकते हैं।
बड़े ब्रांड्स के ऊपर हुआ था केस
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर 2025 में टेक्सास के अटॉर्नी जनरल ने पांच बड़े टीवी ब्रांड्स के खिलाफ केस भी दायर किया था। इससे यह साफ होता है कि डेटा प्राइवेसी को लेकर अब कानूनी स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों की एक रिसर्च ने इस चौंकाने वाले सच से पर्दा उठाया था। यह सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आपकी हर पसंद और नापसंद पर नजर रखने वाला एक जासूस बन चुका है।
इसे बंद कैसे करें
यूट्यूबर ने अलग-अलग स्मार्ट टीवी में सेटिंग्स बंद करने के तरीके भी बताए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग ब्रांड्स में अलग सेटिंग्स होती हैं, जिससे इस ट्रैकिंग को बंद किया जा सकता है। लेकिन याद रखें, हर बार सिस्टम अपडेट के बाद ये सेटिंग्स अपने आप ऑन हो सकती हैं, इसलिए इन्हें बार-बार चेक करते रहें:
Samsung Smart TV: Settings > All Settings > General & Privacy > Terms & Privacy में जाकर इसे बंद करें।
LG Smart TV: Settings > General > System > Additional Settings में जाकर टॉगल ऑफ करें। फिर Settings > Support > Privacy & Terms > User Agreements में जाकर भी इसे डिसेबल करें।
Sony: Settings > All Settings > Samba Interactive TV को ऑफ कर दें।
Roku (TCL, Philips): Settings > Privacy > Smart TV Experience में जाकर ‘Use info from TV Inputs’ को अनचेक करें।
Amazon Fire TV: Settings > Preferences > Privacy Settings में मौजूद तीनों बटनों को बंद कर दें।
Vizio: Menu > Settings > All Settings > Admin & Privacy में जाकर बदलाव करें।
स्मार्ट टीवी हमारी जिंदगी को आसान जरूर बनाते हैं, लेकिन इसके साथ प्राइवेसी का सवाल भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि आप टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल समझदारी से करें और अपनी सेटिंग्स को समय-समय पर चेक करते रहें।

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