April 19, 2026

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वर्ल्ड इकोनॉमिक : टॉप पांच से बाहर हुआ भारत, जानिए आखिर क्यों आई इकोनॉमी में गिरावट?

IMF के ताज़ा ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ अनुमानों के मुताबिक, नॉमिनल GDP के मामले में भारत दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट से बाहर हो गया है। अनुमानों के अनुसार, रैंकिंग में आई यह गिरावट ज्यादा समय तक नहीं रहेगी।

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के मुताबिक, भारत अब दुनिया की पांचवीं नहीं बल्कि छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। यह बदलाव मुख्य रूप से डॉलर में मापे जाने वाले जीडीपी (Nominal GDP) के आधार पर हुआ है। इसमें भारत अब टॉप-5 से बाहर हो गया है। हालांकि, इस गिरावट को भारत की आर्थिक कमजोरी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। जानकारों के अनुसार, यह बदलाव असल आर्थिक प्रदर्शन से ज्यादा मुद्रा (currency) की वजह से हुआ है।

साल 2025 में भारत की जीडीपी 3.92 ट्रिलियन डॉलर रही, जो ब्रिटेन (4 ट्रिलियन डॉलर) से थोड़ी पीछे है। रैंकिंग में आई एक पायदान की गिरावट के बाद IMF का प्रोजेक्शन बताता है कि यह झटका अस्थायी है। IMF के अनुमान के अनुसार भारत 2031 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। यानी अगले कुछ सालों में भारत की आर्थिक कोशिशें सिर्फ रिकवरी की नहीं, बल्कि एक बड़ी छलांग लगाने की होगी।

भारत से आगे कौन से देश?

2025 के आधार पर टॉप 6 देशों की GDP

रैंक                     देश                              GDP (ट्रिलियन डॉलर)
1                   अमेरिका (US)                  30.8
2                  चीन (China)                    19.6
3                  जर्मनी (Germany)           4.7
4                  जापान (Japan)                4.44
5                  यूनाइटेड किंगडम (UK)     4.0
6                  भारत (India)                    3.92

वहीं 2026 के लिए IMF की रैंकिंग में भारत की जीडीपी 4.15 ट्रिलियन डॉलर, ब्रिटेन की 4.26 ट्रिलियन डॉलर, जापान की 4.38 ट्रिलियन डॉलर, जर्मनी की 5.45 ट्रिलियन डॉलर, चीन 20.85 ट्रिलियन डॉलर और अमेरिका की 32.38 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। बता दें, IMF सभी देशों की GDP को डॉलर में मापता है।

क्या है रैंकिंग में गिरावट की वजह?

IMF के आंकड़ों के अनुसार, भारत की रैंकिंग गिरने के पीछे सबसे बड़ी वजह भारतीय रुपये की कमजोरी है। जब किसी देश की अर्थव्यवस्था को अमेरिकी डॉलर में मापा जाता है, तो मुद्रा का उतार-चढ़ाव सीधे जीडीपी के आकार को प्रभावित करता है। यानी भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू स्तर पर बढ़ रही है, लेकिन रुपये के कमजोर होने से डॉलर में उसका मूल्य थोड़ा कम दिखाई देता है, जिससे रैंकिंग प्रभावित हुई है। इसके अलावा, जीडीपी की गणना के बेस ईयर में बदलाव जैसे तकनीकी कारणों ने भी इस स्थिति को प्रभावित किया है।

क्या यह गिरावट स्थायी है?

IMF के प्रोजेक्शन बताते हैं कि यह स्थिति लंबे समय तक रहने वाली नहीं है। भारत की मजबूत ग्रोथ दर के चलते आने वाले वर्षों में वह फिर से ऊपर जा सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे मजबूत

सबसे अहम बात यह है कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जहां ग्रोथ करीब 6.5% के आसपास बनी हुई है। अर्थव्यवस्था के जानकार मानते हैं कि यह गिरावट स्थायी नहीं है। इसके पीछे कोई आर्थिक कमजोरी नहीं, बल्कि डेटा और करेंसी से जुड़े बदलाव हैं। भारत की वास्तविक आर्थिक स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है, खासतौर पर तेज विकास दर, बढ़ती खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश इसकी बड़ी ताकत हैं।

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