- “दशकों तक वोट लिए, लेकिन नेतृत्व नहीं दिया; मुस्लिम समाज अब तथ्यों के आधार पर फैसला करे” : सैय्यद सद्दाम अली
भोपाल। समाजसेवी एवं राजनीतिक विश्लेषक सैय्यद सद्दाम अली ने कांग्रेस पार्टी पर मुस्लिम समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि देश के मुसलमानों को अब भावनाओं और डर की राजनीति से ऊपर उठकर तथ्यों, विकास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
सैय्यद सद्दाम अली ने कहा कि वर्षों तक मुस्लिम समाज के बीच भारतीय जनता पार्टी को लेकर भय का माहौल बनाया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि भाजपा ने समय-समय पर मुस्लिम समाज के अनेक नेताओं को राष्ट्रीय राजनीति और संवैधानिक पदों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम को देश का राष्ट्रपति बनाना भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। इसके अलावा डॉ. नजमा हेपतुल्ला, मुख्तार अब्बास नकवी, एम. जे. अकबर, सैयद जफर इस्लाम और वर्तमान में गुलाम अली खटाना जैसे नेताओं को राज्यसभा में भेजकर भाजपा ने मुस्लिम समाज को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व दिया है। वहीं आरिफ मोहम्मद खान जैसे वरिष्ठ नेता को राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
उन्होंने कहा कि भाजपा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके प्रयास” के मूल मंत्र पर कार्य करती है। यही कारण है कि केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं में कभी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ हिंदुओं को भी मिला और मुसलमानों को भी। इसी प्रकार विभिन्न राज्यों की जनकल्याणकारी योजनाओं में पात्रता के आधार पर लाभ दिया गया, न कि धर्म देखकर।
सैय्यद सद्दाम अली ने कहा कि उन्होंने पिछले 16 वर्षों में भाजपा और कांग्रेस दोनों की राजनीति को बहुत गंभीरता से देखा और समझा है। उनके अनुसार कांग्रेस ने दशकों तक मुस्लिम समाज से वोट तो लिए, लेकिन जब नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने की बात आई तो समाज को अपेक्षित स्थान नहीं मिला। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि जो पार्टी स्वयं को मुसलमानों की सबसे बड़ी हितैषी बताती है, वह यह बताए कि हाल के वर्षों में उसने कितने मुस्लिम नेताओं को राज्यसभा, संगठन या अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पदों पर अवसर दिया।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को यह समझना होगा कि केवल चुनाव के समय याद किया जाना और बाद में राजनीतिक रूप से हाशिए पर छोड़ दिया जाना किसी भी समाज के हित में नहीं है। लोकतंत्र में सम्मान केवल वोट देने से नहीं, बल्कि नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी से मिलता है।
सैय्यद सद्दाम अली ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि समाज डर और भ्रम की राजनीति से बाहर निकले तथा यह मूल्यांकन करे कि कौन सा राजनीतिक दल उसे विकास, सम्मान, प्रतिनिधित्व और नेतृत्व के अवसर प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम समाज ने अपने राजनीतिक भविष्य और प्रतिनिधित्व के सवाल पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो उसे केवल वोट बैंक बनाकर रखने की राजनीति आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि आज का मुसलमान शिक्षित, जागरूक और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने वाला नागरिक है। वह अब केवल नारों से नहीं, बल्कि कार्यों और परिणामों से राजनीतिक दलों का मूल्यांकन करता है। इसलिए समय की मांग है कि मुस्लिम समाज अपने हितों, विकास और राजनीतिक भागीदारी को केंद्र में रखकर निर्णय ले।

सैय्यद सद्दाम अली
अधिवक्ता एवं राजनीतिक विश्लेषक
संपर्क : 9826786131

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