संजय राउत का दावा : अजित पवार की मौत महज एक हादसा नहीं, बल्कि एक गहरा रहस्य
उड़ान डेस्क। संसद के उच्च सदन राज्यसभा में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने अजित पवार की मौत पर गंभीर सवाल खडे करते हुए उनकी मौत को ‘रहस्यमयी’ बताया है। उन्होंने कहा कि अजीत पवार के पास ‘BJP की सीक्रेट फाइल’ थी, जो गायब है, इसकी सूक्ष्मता से न्यायिक जांच होनी चाहिए। राउत के इस सनसनीखेज दावे पर हड़कंप मच गया। राउत के ऐसे गंभीर दावे पर राज्यसभा में कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए राउत ने न केवल दिवंगत नेता अजित पवार की मौत पर गंभीर सवाल खड़े किए, बल्कि एक ऐसी ‘फाइल’ का जिक्र किया जो सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचाने के लिए काफी है। राउत का यह बयान भारतीय राजनीति में ‘दबाव और साजिश’ की एक नई और डरावनी बहस को जन्म दे रहा है।
“अजित पवार के पास थी बीजेपी की कुंडली”
संजय राउत ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि अजित पवार की मौत महज एक हादसा नहीं, बल्कि एक गहरा रहस्य है। उन्होंने इस घटनाक्रम को ‘सिंचाई घोटाले’ और उन ‘सीक्रेट फाइलों’ से जोड़ा जो पवार हमेशा अपने साथ रखते थे।
फाइल का रहस्य
राउत ने दावा किया कि 15 जनवरी को अजित पवार ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि सिंचाई घोटाले में केवल उन्होंने नहीं, बल्कि बीजेपी के नेताओं ने भी जमकर पैसा खाया है और उनके पास बीजेपी के नेताओं की पूरी ‘फाइल’ मौजूद है।
मौत की टाइमिंग पर सवाल
राउत ने जोर देकर कहा कि इस बयान के ठीक 10 दिन बाद अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे मुंबई से बारामती के लिए निकले थे, तब भी वह ‘फाइल’ उनके पास थी।
न्यायिक जांच की मांग और संस्थाओं पर प्रहार
संजय राउत ने सीधे तौर पर आरोप लगाने से बचते हुए इसे एक “रहस्यपूर्ण संयोग” करार दिया और मांग की कि इस पूरे प्रकरण की एक स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी कड़े प्रहार किए। राउत ने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र केवल नाम का रह गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को सरकार की ‘कठपुतली’ और चुनाव आयोग को बीजेपी की ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ तक कह डाला।
सोनम वांगचुक और किसान
संजय राउत ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और सरकार पर आरोप लगाया कि चीन द्वारा जमीन कब्जाने की बात कहने पर उन्हें देशद्रोही बताकर जेल में डाल दिया गया। साथ ही, मनरेगा का नाम बदलने और किसानों के रोजगार कम करने को लेकर भी सरकार को घेरा।

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