प्रतापपुर (चतरा)
बस कुछ कदम दूर बिहार है।वहां रातभर गांव रोशनी में जगमगाते रहते हैं और यहां पूरा गांव अंधेरे में डूबा रहता है।झारखंड-बिहार सीमा पर बसे प्रतापपुर प्रखंड के गांवों में इन दिनों यही दर्द लोगों की जुबान पर है।बिजली व्यवस्था की बदहाली ने ग्रामीणों का जीवन बेहाल कर दिया है।
लोगों का आरोप है कि गांवों में दिनभर में मुश्किल से दो से तीन घंटे बिजली मिल रही है, वह भी लो वोल्टेज के सहारे। हालत यह है कि पंखे ठीक से नहीं चल पा रहे और रातभर उमस भरी गर्मी में लोग जागने को मजबूर हैं।
सीमावर्ती गांवों के लोग जब रात के अंधेरे में बिहार के गांवों को 24 घंटे बिजली से जगमगाते देखते हैं, तो उनके भीतर व्यवस्था को लेकर गहरी मायूसी और आक्रोश उभर आता है। इस पार अंधेरे में डूबे गांव और उस पार रोशनी से चमकते घर लोगों को भीतर तक झकझोर रहे हैं।
कई ग्रामीण अब पीड़ा भरे स्वर में कहते हैं कि काश, हम बिहार से अलग न हुए होते तो शायद आज हमारे गांवों में भी रातभर उजाला रहता। गर्मी के इस मौसम में बिजली संकट ने हालात और भयावह बना दिए हैं।
पूरी रात बिजली कटौती से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बुजुर्ग और मरीज परेशान हैं, जबकि किसान सिंचाई के लिए दर-दर भटक रहे हैं। छोटे दुकानदारों और ग्रामीण कारोबारियों का कामकाज भी ठप पड़ने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की कोई तय समय-सारिणी नहीं रह गई है। कब बिजली आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई भरोसा नहीं। कभी अचानक हाई वोल्टेज आ जाता है तो कभी इतना लो वोल्टेज कि बल्ब तक टिमटिमाने लगते हैं।
लगातार वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से पंखे, टीवी, फ्रिज, मोटर और अन्य उपकरण खराब हो रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा।
सरकारी कार्यालयों में जेनरेटर और इनवर्टर की सुविधा होने के कारण अधिकारियों को ग्रामीणों की पीड़ा का एहसास तक नहीं होता। जनप्रतिनिधियों पर भी लोगों ने उपेक्षा का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांवों की सुध लेने वाला कोई नहीं आता।प्रतापपुर प्रखंड के सीमावर्ती ग्रामीणों ने सरकार और बिजली विभाग से जल्द स्थायी समाधान निकालने तथा नियमित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

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