सरकार एक बार फिर सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार जल्द ही इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) में ऑफर फॉर सेल (OFS) ला सकती है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य बैंक में सरकार की हिस्सेदारी कम करना और मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों का पालन करना है। फिलहाल इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) में सरकार की 92.44% हिस्सेदारी है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही OFS के जरिए अपनी हिस्सेदारी में कमी करेगी।
इससे पहले दिसंबर 2025 में भी सरकार ने OFS के माध्यम से IOB की 2.17% हिस्सेदारी बेची थी। उस समय इस इश्यू को निवेशकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार आने वाले महीनों में अन्य सरकारी बैंकों की भी हिस्सेदारी बेचने की प्रोसेस जारी रख सकती है। इसका उद्देश्य मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग और पब्लिक फ्लोट से जुड़े नियमों का पालन करना है।
सूत्रों के अनुसार, पंजाब एंड सिंध बैंक और यूको बैंक सरकार की अगली हिस्सेदारी बिक्री की लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। फिलहाल पंजाब एंड सिंध बैंक में सरकार की 93.85% हिस्सेदारी है, जबकि यूको बैंक में उसकी 90.95% हिस्सेदारी है। दोनों ही बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी लिस्टेड कंपनियों के लिए तय मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की लिमिट से काफी ज्यादा है।
सरकार क्यों बेचेगी हिस्सेदारी?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी बेचने की योजना केंद्र सरकार की व्यापक विनिवेश (डिसइन्वेस्टमेंट) रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सरकारी कंपनियों के शेयरों में लिक्विडिटी (बाजार में शेयरों की उपलब्धता और कारोबार) बढ़ाना है। हालांकि, सरकार इन बैंकों में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बरकरार रखेगी। यानी बैंक पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा, लेकिन आम निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ेगी।
इस साल 80,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने वर्तमान वित्त वर्ष के लिए 80,000 करोड़ रुपए के एसेट मॉनेटाइजेशन का लक्ष्य तय किया है। इसका मतलब है कि सरकार अपनी कुछ पब्लिक एसेट्स एंड स्ट्रैटेजिक स्टेक्स की बिक्री के जरिए अतिरिक्त फंड जुटाना चाहती है। सरकार की योजना स्ट्रैटेजिक स्टेक सेल और पब्लिक एसेट्स के मॉनेटाइजेशन के जरिए रेवेन्यू बढ़ाने की है। इससे सरकार को डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और अन्य जरूरी खर्चों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। वहीं, पब्लिक सेक्टर की कंपनियों में मार्केट की भागीदारी भी बढ़ेगी, जबकि सरकार का बहुमत नियंत्रण पहले की तरह बना रहेगा।
नोट: यह ख़बर सामान्य जानकारी के लिए है, इसे निवेश की सलाह न समझा जाए। किसी भी वित्तीय निवेश से पहले प्रमाणित सलाहकार से सलाह लें।

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