May 30, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

चंडीगढ़ में खत्म होगा दफ्तरों का चक्कर! अब एक ही छत के नीचे निपटेंगे सारे काम

चंडीगढ़
प्रशासन ने नागरिक सेवाओं को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए यूटी में सिंगल विंडो सिस्टम-यूनिफाइड पोर्टल के प्रभावी तरीके से लागू और सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी विभिन्न राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर चंडीगढ़ में लोगो के लिए सुविधाजनक और आधुनिक प्रणाली विकसित करने पर काम करेगी।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी कार्यालय आदेश के अनुसार कमेटी का गठन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद किया गया। बैठक में तमिलनाडु सरकार की “सिंपल गव” पहल और डी-रेगुलेशन मॉडल पर चर्चा की गई थी।

कमेटी में डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव, सूचना प्रौद्योगिकी सचिव डी. कार्तिकेयन, निदेशक आईटी अविकेश गुप्ता, निदेशक स्कूल शिक्षा नितिश सिंगला और एनआईसी के वरिष्ठ अधिकारी विवेक वर्मा सहित अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है।

कमेटी विभिन्न राज्यों में लागू सिंगल विंडो सिस्टम की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगी और चंडीगढ़ के लिए उपयुक्त मॉडल की सिफारिश करेगी। साथ ही विभिन्न सरकारी सेवाओं की प्रक्रिया को सरल बनाने, प्रोसेस री-इंजीनियरिंग करने और अनावश्यक औपचारिकताओं को कम करने पर भी काम किया जाएगा।

प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत देना और अधिकतर सेवाओं को एकीकृत पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराना है। इससे मंजूरियों और सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिक हितैषी बनाने में मदद मिलेगी।

क्या है तमिलनाडु का मॉडल
प्रशासन यदि तमिलनाडु की सिंपल गव और डी-रेगुलेशन नीति लागू करता है तो नागरिक सेवाओं और उद्योगों को बड़ा लाभ मिल सकता है। इस मॉडल के तहत सिंगल विंडो सिस्टम, आनलाइन मंजूरियां, सेल्फ-सर्टिफिकेशन और अनावश्यक नियमों में कमी से लोगों को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे।

भवन नक्शा, व्यापार लाइसेंस, एनओसी और विभिन्न प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सकती है। इससे भ्रष्टाचार और फाइलों में देरी कम होगी। उद्योगों और कारोबारियों को भी कम समय में मंजूरी मिलने से निवेश बढ़ने तथा “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” में सुधार की संभावना है।

DPR लोड करते ही बन जाएगा एस्टीमेट

लोकल बॉडीज महकमे की ओर से तैयार कराए गए EPM सॉफ्टवेयर में तमाम तरह की कैलकुलेशन से लेकर एस्टीमेट बनाने तक सबकुछ किया जा सकता है। अब अफसरों को 50 लाख रुपए से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट की DPR तैयार कर उसे EPM सॉफ्टवेयर में अपलोड करना होगा। उसके बाद सॉफ्टवेयर खुद ही पहले से फीड आइटम और रेट्स के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर देगा। अधिकारियों को सॉफ्टवेयर में सिर्फ आइटम के कोड सिलेक्ट करने होंगे।

भागदौड़, कागज, पैसा और समय सबकुछ बचेगा
लोकल बॉडीज महकमे में EPM सॉफ्टवेयर लागू होने के बाद सबसे बड़ी राहत अधिकारियों को मिलेगी। उन्हें DPR तैयार कर उसकी फाइल लेकर चंडीगढ़ तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। चंडीगढ़ के चक्कर लगाने में लगने वाला उनका समय और पैसा-दोनों बचेंगे। एस्टीमेट ऑनलाइन चंडीगढ़ मुख्यालय जाने से कागज-स्टेशनरी भी बचेगी।

काम शुरू होने के बाद ही पता चलेगी कमियां
EPM सॉफ्टवेयर की कमियों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारियों ने कहा कि अभी तो सिस्टम लॉन्च हुआ है। जब इस पर काम शुरू होगा, तब धीरे-धीरे इसके बाकी फंक्शन वगैरह पता लगेंगे। उसके बाद अगर किसी तरह की कोई कमी सामने आएगी तो उसे संबंधित प्लेटफॉर्म पर रखा जाएगा।

ठेकेदारों को एक करोड़ से ऊपर का भुगतान अब सिर्फ ऑनलाइन
अभी तक लोकल बॉडीज महकमे में जिन ठेकेदारों के काम एक करोड़ रुपए से ऊपर के होते थे, उन्हें अपनी पेमेंट के लिए बिल और वर्क कम्प्लीशन की फाइल पास कराने के लिए चंडीगढ़ ले जानी पड़ती थी। इसमें भ्रष्टाचार की गुंजाइश रहती थी। अब ये सारी जानकारी EPM सॉफ्टवेयर की मार्फत एसडीओ, एक्सईएन, एसई से होते हुए आगे तक जाएगी। हर अधिकारी देख पाएगा कि संबंधित पेमेंट को लेकर किसने क्या रिमार्क दिया है। पेमेंट को मंजूरी मिलने के बाद ठेकेदारों को भुगतान भी ऑनलाइन होगा।

Spread the love