आजकल टेक्नोलॉजी का दौर है। हर जगह टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में भारत के लिए कई बड़ी खबरें सामने आई हैं। OpenAI भारत में अपना पहला डेटा सेंटर खोलने की तैयारी कर रहा है। ये कदम भारत को टेक्निकली मजबूत बनाएगा। अडानी ग्रुप ने भी AI को लेकर अपने बड़े दांव का ऐलान किया है। वह 2035 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले, हाइपरस्केल डेटा सेंटर बनाने के लिए 100 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह दुनिया के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड एनर्जी और कंप्यूट प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है।
इसका मकसद केवल भारत को टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ाना ही नहीं है बल्कि उसको दुनिया के लिए AI टेक्नोलॉजी बनाने और एक्सपोर्ट करने वाला देश बनाना है। कंपनी ने जिस तरह से AI डेटा सेंटर्स का प्लान तैयार किया है, उससे भारत को AI की रेस में ग्लोबल लीडर बनने से कोई नहीं रोक सकेगा।
क्या होता है डेटा सेंटर
डेटा सेंटर को एक डिजिटल लाइब्रेरी की तरह समझ सकते हैं। जैसे लाइब्रेरी में किताबें सही ढंग से रखी जाती हैं और लोग उन्हें पढ़ने या लेने के लिए आते हैं। ठीक वैसे ही डेटा सेंटर में सर्वर और स्टोरेज डिवाइस होते हैं जिनमें वेबसाइट्स, ऐप्स, ईमेल, फोटो, वीडियो और इंटरनेट से जुड़ी हर चीज स्टोर रहती है। जब आप यूट्यूब पर कोई वीडियो देखते हैं, नेटफ्लिक्स पर मूवी स्ट्रीम करते हैं या गूगल पर कुछ सर्च करते हैं तो सारी डिटेल्स इन्हीं डेटा सेंटर से आपके मोबाइल या कंप्यूटर तक पहुंचती हैं।
भारत के लिए इसलिए है खास?
इससे भारत में ChatGPT जैसी सर्विसेस की स्पीड और क्वालिटी बेहतर होगी। इसके जरिए टेक सेक्टर में हजारों नई नौकरियां निकलेंगी। भारत के लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। भारतीय यूजर्स का डेटा देश के अंदर स्टोर होने से सेफ्टी बढ़ेगी।
भारत में डेटा सेंटर के लिए बेहतर मौका
जब डेटा सेंटर बनाने की बात आती है, तो भारत के पास कई फायदे हैं। एशिया पैसिफिक क्षेत्र में जापान, ऑस्ट्रेलिया, चीन और सिंगापुर जैसे बाजार मैच्योर हो चुके हैं। सिंगापुर, जो इस क्षेत्र के सबसे पुराने डेटा सेंटर हब में से एक है, वहाँ जमीन की उपलब्धता की समस्याओं के कारण बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने के लिए सीमित जगह है। इधर भारत में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर डेवलपमेंट के लिए बहुत ज्यादा जगह है। यूरोप के डेटा सेंटर हब के मुकाबले भारत में बिजली की लागत अपेक्षाकृत कम है। भारत की बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को देखते हुए भारत में ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाले डेटा सेंटर आसानी से बनाए जा सकते हैं।

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