यमुना नगर.
यमुनानगर में लगातार उजागर हो रहे अवैध खनन के नेटवर्क पर आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। दैनिक जागरण द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों के बाद करनाल स्पेशल टास्क फोर्स और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने इंद्री और लाडवा क्षेत्र में अवैध खनन सामग्री से भरे 100 से अधिक वाहनों को पकड़कर खनन माफिया पर बड़ा शिकंजा कसा है।
जांच में अब तक 25 से अधिक वाहनों के पास ई-रवन्ना, रॉयल्टी और परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कई चालक हाईवे और ढाबों पर वाहन छोड़कर फरार हो गए। बेलगढ़ क्षेत्र, यमुना नदी और आसपास के इलाकों में अवैध खनन नेटवर्क चल रहे है। खबरों में बार-बार सामने लाया गया कि किस प्रकार यमुनानगर से प्रतिदिन भारी संख्या में खनन सामग्री से भरे वाहन प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जिले में 20 से अधिक माइनिंग नाके होने के बावजूद अवैध खनन सामग्री से भरे वाहन यमुनानगर से निकलकर करनाल तक कैसे पहुंच गए। यदि सीमाओं पर निगरानी और जांच व्यवस्था सक्रिय थी तो इतने बड़े स्तर पर वाहन पकड़े जाने से पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए अधिकांश वाहनों के पास वैध दस्तावेज नहीं मिले। कई वाहनों के नंबर, रजिस्ट्रेशन और परिवहन रिकॉर्ड की जांच भी की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि अवैध खनन का यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वैध खनन कारोबारियों का कहना है कि एक ओर वे करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार से खनन ब्लॉक लेते हैं और नियमित राजस्व जमा करते हैं, वहीं दूसरी ओर अवैध खनन माफिया सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार अवैध खनन के कारण वैध एजेंसियों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले में 30 के करीब माइनिंग ब्लॉक समय पर भुगतान न होने और अन्य कारण से पहले ही बंद हो चुके हैं, जबकि कई अन्य ब्लॉक भी बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो वैध खनन उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है। जिले में केवल दो ही साइट चल रही है। यमुना सेवा समिति के प्रधान किरण पाल राणा का कहना है कि करनाल में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि यमुनानगर से संचालित अवैध खनन का नेटवर्क केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा दूसरे जिलों तक फैला हुआ है। मामले की जांच होनी चाहिए। जिन नाको से वाहन निकले उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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