पटना
बिहार सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठकों (Bihar Cabinet) की कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया गया है। अब राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विभागीय एजेंडा संबंधित मंत्री स्वयं प्रस्तुत करेंगे। इसकी शुरुआत प्रायोगिक तौर पर 13 मई को हुई कैबिनेट बैठक से कर दी गई।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Bihar CM Samrat Choudhary) की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी विभागों के मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों के प्रस्ताव और एजेंडे खुद रखे।
सीएम सम्राट की पहल, मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी
अब तक कैबिनेट बैठकों में विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव एजेंडा प्रस्तुत करते थे और उसी पर चर्चा होती थी, लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल पर व्यवस्था में बदलाव करते हुए मंत्रियों को सीधे तौर पर अपनी योजनाओं और प्रस्तावों को रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार का मानना है कि इससे मंत्रियों की जवाबदेही बढ़ेगी और विभागीय योजनाओं को लेकर उनकी भूमिका अधिक प्रभावी होगी।
बीते बुधवार को हुई बैठक में कुल 18 एजेंडे पेश किए गए। इनमें वाणिज्य कर, वित्त, गृह, उद्योग, उच्च शिक्षा, शिक्षा, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, राजस्व एवं भूमि सुधार तथा परिवहन विभाग से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे।
बैठक के दौरान कई मंत्रियों ने अपने विभाग की योजनाओं और प्रस्तावों को विस्तार से रखा तथा विभिन्न मुद्दों पर प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखी।
प्रशासनिक स्तर पर जरूरी बदलाव
सरकार के इस नए प्रयोग को प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इससे मंत्रिमंडल की बैठकों में मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सीधी भूमिका और मजबूत होगी।

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