गोरखपुर
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के अध्ययन ने उत्तर प्रदेश में हेपेटाइटिस ए के बढ़ते प्रकोप को लेकर गंभीर चिंता जताई है। देश के 21 राज्यों में कराए गए इस व्यापक सर्वेक्षण में क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) गोरखपुर की भी अहम भूमिका रही।
अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में संक्रमण की दर अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। इसलिए इस प्रदेश को हाई रिस्क जोन में रखा गया है। यहां 97 प्रतिशत नमूने पाजिटिव पाए गए। देश में संक्रमण दर 90 प्रतिशत पाई गई। सभी 21 राज्यों से 14778 नमूने लिए गए, इनमें से 12236 नमूने पाजिटिव मिले।
उत्तर प्रदेश के नौ जिलों से कुल 1957 लोगों के नमूने एकत्र कर उनकी जांच की गई। इसमें से 1879 अर्थात 97 प्रतिशत नमूने हेपेटाइटिस ए पाजिटिव पाए गए। यह आंकड़ा राज्य में संक्रमण के व्यापक फैलाव की ओर संकेत करता है। इसके विपरीत, अन्य राज्यों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई। सबसे कम केरल में 44.8 प्रतिशत और बंगाल में 63.1 प्रतिशत नमूने पाजिटिव मिले। अन्य राज्यों में संक्रमण दर इससे ज्यादा रही।
इस महत्वपूर्ण अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। इसे दिसंबर 2025 में लंदन के जर्नल द लांसेंट रिजनल हेल्थ ने प्रकाशित किया है। रिपोर्ट के आधार पर आइसीएमआर ने भारत सरकार को सुझाव दिया है कि हेपेटाइटिस ए के टीके को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि भविष्य में इस बीमारी के प्रकोप को रोका जा सके।
विशेषज्ञ इसे नान अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) का बड़ा कारण मान रहे हैं। एनएएफएलडी पर आरएमआरसी की एक टीम लखनऊ के नगराम क्षेत्र में अध्ययन कर रही है। दूसरी टीम लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर व महराजगंज के थारू समुदाय में हेपेटाइटिस की जांच कर रही है।

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