May 15, 2026

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Moody’s ने भारतीय अर्थव्यवस्था की GDP ग्रोथ घटाया, 2026 के लिए 6% विकास दर की उम्मीद

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी Moody’s ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर बड़ा झटका देने वाला अनुमान जारी किया है। एजेंसी ने 2026 और 2027 के लिए भारत की GDP Growth Forecast घटाकर 6% कर दी है। पहले यह अनुमान 6.8% के आसपास था। Moody’s का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, ऊंची ऊर्जा कीमतें और सप्लाई चेन संकट भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

मूडीज के मुताबिक 2025 में भारत की विकास दर 7.5 फीसदी रह सकती है, लेकिन उसके बाद स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। मूडीज का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था पर कई मोर्चों से दबाव बढ़ रहा है। एजेंसी ने साल 2026 के लिए ग्रोथ अनुमान घटाकर 6 फीसदी किया है। वहीं, कैलेंडर ईयर 2027 के लिए भी ग्रोथ का अनुमान 0.5 परसेंटेज पॉइंट घटाकर 6 फीसदी रखा गया है।

एजेंसी ने क्या कहा ?
अपने ‘ग्लोबल मैक्रो आउटलुक मई 2026’ अपडेट में, मूडीज़ ने कहा कि ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों, ईंधन और उर्वरक की आपूर्ति में आई बाधाओं का असर अगले छह महीनों में अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं पर अलग-अलग होगा। यह असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वे अर्थव्यवस्थाएं इन स्थितियों के प्रति कितनी संवेदनशील हैं और उनमें इनसे निपटने की कितनी क्षमता है। भारत जैसे देशों पर इसका असर अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है, क्योंकि उनकी निर्भरता इन संसाधनों पर काफी है।

ग्लोबल अनिश्चितता और जियो पॉलिटिकल तनाव
मूडीज ने यह भी कहा है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य फिलहाल काफी अनिश्चित बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और कमजोर पड़ती संघर्ष विराम स्थिति ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। एजेंसी का अनुमान है कि इस वजह से कई देशों की विकास दर पर अलग-अलग स्तर पर असर पड़ेगा। भारत के लिए अनुमानित आर्थिक नुकसान लगभग 0.8 प्रतिशत अंक तक हो सकता है।

तेल और गैस की कीमतें बनी सबसे बड़ी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। कच्चे तेल और LNG की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए बड़ा खतरा बन रही है। भारत अपनी लगभग 90 फीसदी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल महंगा होने का असर सीधे अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

होर्मुज संकट से बढ़ी टेंशन
मूडीज ने खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का जिक्र किया है। भारत के LPG आयात का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से आता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के करीब 90 फीसदी LPG आयात Hormuz रूट से गुजरते हैं। अगर यह रास्ता लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो भारत पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

किन सेक्टर्स पर पड़ेगा असर?
मूडीज ने कहा कि ऊंची ऊर्जा कीमतों की वजह से महंगाई बढ़ सकती है। कंपनियों का मुनाफा घट सकता है। निजी खपत कमजोर पड़ सकती है। औद्योगिक गतिविधियां धीमी हो सकती हैं। पूंजीगत निवेश पर असर पड़ सकता है। सरकार के खर्च पर दबाव बढ़ सकता है।

महंगे तेल से क्या होगा असर?
Moody’s के अनुसार ऊंची ऊर्जा कीमतों का असर कई स्तरों पर दिखाई देगा:

  1. आयात बिल बढ़ेगा
  2. व्यापार घाटा बढ़ सकता है
  3. महंगाई पर दबाव रहेगा
  4. सरकारी सब्सिडी खर्च बढ़ सकता है
  5. निजी खपत कमजोर हो सकती है
  6. एजेंसी ने कहा कि बढ़ती ईंधन और उर्वरक लागत सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी दबाव बना सकती है।

OMC कंपनियों पर कितना दबाव?
सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। भारत की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी (Oil Marketing Companies) रोजाना करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू ईंधन कीमतों में सीमित बदलाव हुआ है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत को अब ज्यादा मात्रा में क्रूड ऑयल (Crude Oil), LNG और LPG का स्टॉक बनाना पड़ सकता है।

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