June 24, 2026

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पंचायत राज : कारनामा गबन का… कार्यवाही मात्र ट्रांसफर

• नए स्थान पर पुराना काम, अपराध की सजा अदा कर किश्तों में

खान अशु, भोपाल

ग्राम स्वराज की भावना और भ्रष्टाचार मुक्त समाज के सारे दावे फैल हो रहे हैं। गबन के आरोपियों को महज तबादला कर नए स्थान पर कमाई के लिए छोड़ दिया गया है। दिखावे की कार्रवाई के नाम पर इन भ्रष्टाचारियों से किश्तों में वसूली की जा रही है। जिले और ब्लॉक के अधिकारी भी इस गड़बड़झाले को आँखें मूंदकर देख रहे हैं।
मामला धार जिले के उमरबन ब्लॉक का है। यहां ब्लॉक के अधीन आने वाली विभिन्न पंचायतों में आर्थिक अनियमितता, गबन, अमानत में खयानत और भ्रष्टाचार के पंचायत सचिव चिन्हित किए गए। वर्ष 2011 से 2015 के बीच हुए इस घोटाले में एक या दो नहीं, बल्कि दो दर्जन से ज्यादा सचिव आरोपी पाए गए। कालावधि में एक सचिव अनिल सेन का तो निधन भी हो गया है।

यह हुई दिखावे की कार्रवाई
सूत्रों का कहना है कि उमरबन ब्लॉक की विभिन्न पंचायतों में राजेश गिरवाल(लवाणी), राजाराम कनेल(मिर्जापुर), सुरेश डाबर(जलाखेड़ा), पप्पू निगवार(लवाणी), हुकुम भगोरे(झिरवी), तुकाराम चौहान, (पेटल),  आरती ग्वाले(अमलाह), मांगीलाल, अमर सिंह कनेल, सीताराम कनेल, बलराम मंडलोई, कैलाश चौहान, छोटू शंकर मौर्य, तुकाराम चौहान, हुकुम भगोरे, निर्मल सिसोदिया, सोहन, फाल सिंह भवल, अनिल सेन(मंडावद) आदि भ्रष्टाचार के आरोप में आरोपी साबित हुए। सूत्र बताते हैं कि विभाग ने इन सचिवों पर कार्रवाई के नाम पर महज इनका ट्रांसफर अन्यत्र कर दिया है। जबकि इनके वित्तीय अधिकार पूर्ववत ही रखे गए। जिससे यह लोग जगह बदलने के अलावा अपना कार्य और व्यवहार पहले जैसा ही बनाए हुए हैं। भ्रष्टाचार के इनके कार्यक्रम बदले गए स्थान पर भी अनवरत जारी हैं, फर्क यह आया है कि अब यह भ्रष्टाचार करने से पहले सतर्क रहते हैं।

क्या कहता है नियम
मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में धारा 40 और धारा 92 के तहत पंचायत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए कठोर प्रावधान किए गए हैं। भ्रष्टाचार या आर्थिक अनियमितता पाए जाने पर उन्हें पद से हटाने या वित्तीय अधिकार छीन लिए जाने की व्यवस्था है। साथ ही ऐसे कर्मचारियों से गबन या भ्रष्टाचार की राशि वसूलने का भी प्रावधान है।

हर माह किश्तों में सजा
सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचार के इन आरोपियों को वित्तीय अधिकार वापस लिए बिना दूसरे स्थान पर पदस्थ कर दिया गया है। जहां वे पहले की ही तरह भ्रष्टाचार करके पिछले आरोप की राशि हर माह किश्तों में जमा कर रहे हैं।

एक उदाहरण यह भी
इतने घपलों घोटाले के बीच इस ब्लॉक में नारी सशक्तिकरण की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। श्रीमती आरती ने ग्राम पंचायत की  राशि विद्युत प्रकाश व्यवस्था के लिए निकाली और ग्रामीणों के विरोध करने पर की दूसरे विकास कामों में राशि खर्च कर दी। बाद में सचिव श्रीमती आरती ने बापा ग्राम पंचायत के खाते में जमा भी कर दी इतनी। उनकी इस गलती पर भी धारा 92 एवं धारा 40 लगाकर वित्तीय प्रभार  से अलग कर दिया गया है, लंबे अंतराल के बाद भी उन्हें वित्तीय नहीं दिए गए हैं, जबकि अन्य सचिवों ने डाके डाले फिर भी वित्तीय प्रभार देकर पुनः बंदर बांट खा खेल अनवरत जारी है।

अधिकारियों का लचीलापन
सूत्र बताते हैं कि भ्रष्टाचार के इन आरोपी सचिवों का रिकॉर्ड वर्षों से विभाग की पेंडेंसी बना हुआ था। जिला मुख्यालय से लेकर तहसील और ब्लॉक के अधिकारियों की जानकारी में होने के बाद भी उन भ्रष्ट कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

मामला पहुंचा राजधानी
इस मामले को लेकर जल्दी ही राजधानी भोपाल में शिकायत का दौर शुरू होने वाला है। पंचायत मंत्री से लेकर उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की शिकायत की जाने की तैयारी की गई है। इस मामले में जब उमरबन पंचायत के सीईओ पचौरी से जानकारी चाही तो उन्होंने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया।

इनका कहना
• भ्रष्टाचार किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।शिकायत मिलने पर दोषी अधिकारी-कर्मचारियों कार्यवाही की जाएगी।
प्रह्लाद पटेल, पंचायत मंत्री

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