April 19, 2026

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फाल्गुन अमावस्या : पितरों की शांति के लिए सरल पूजा विधि, क्या करें और क्या चढ़ाएं

Phalguna Amavasya 2026 : वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष फाल्गुन अमावस्या की तिथि 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 17 फरवरी को शाम 5 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। वहीं, उदयातिथि के आधार पर यह अमावस्या 17 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। फाल्गुन अमावस्या पूजा विधि हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की अमावस्या को अत्यंत पवित्र और फलदायी तिथि माना जाता है।

यह दिन केवल एक चंद्रहीन रात्रि भर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, पितृ स्मरण और आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर होता है। फाल्गुन अमावस्या को पितरों की शांति, पापों की क्षमा और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए श्रेष्ठ दिन माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए जप, तप, दान और तर्पण का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

क्या फाल्गुन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण दिखाई देगा?

खगोल गणनाओं के अनुसार वर्ष 2026 की फाल्गुन अमावस्या के दिन आंशिक सूर्य ग्रहण का संयोग बन रहा है। हालांकि यह ग्रहण भारत में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा। ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का प्रभाव माना जाता है, किंतु चूंकि यह भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। इस कारण सामान्य पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा के संपन्न किए जा सकते हैं।

पूजन विधि और आवश्यक सामग्री : फाल्गुन अमावस्या पर विधिपूर्वक पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। घर पर सरल विधि से भी पूजा की जा सकती है।

पूजन सामग्री : तांबे का लोटा, गंगाजल, काले तिल कुशा, सफेद फूल, दीपक और घी धूप-अगरबत्ती, मौसमी फल और मिठाई

व्रत और अनुष्ठान : इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर सात्विक आहार ग्रहण किया जाता है या निर्जल/फलाहार व्रत रखा जाता है। शाम को दीपदान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व होता है।

फाल्गुन अमावस्या के सरल घरेलू अनुष्ठान : जो लोग तीर्थ स्थान नहीं जा सकते, वे घर पर ही सरल विधि से पूजा कर सकते हैं।

  •  तैयारी (सूर्योदय से पहले) ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
  • पूजा स्थल की स्थापना घर के मंदिर या शांत स्थान पर एक चौकी रखें। उस पर सफेद कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु या शिव का चित्र स्थापित करें। दीपक प्रज्वलित करें।
  •  संकल्प तांबे के पात्र में जल लेकर संकल्प लें कि आप पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा कर रहे हैं।
  •  तर्पण (पितरों को अर्पण) जल में काले तिल और कुशा मिलाकर पितरों के नाम से तीन बार अर्पित करें।
  • “ॐ पितृभ्यः स्वधा” मंत्र का उच्चारण करें।
  • दीपदान संध्या समय पीपल वृक्ष के नीचे या घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं।
  • पितरों की शांति और परिवार की उन्नति की प्रार्थना करें।

क्या भोग चढ़ाएं?

फाल्गुन अमावस्या पर पितरों को खीर, पूड़ी, मौसमी फल और काले तिल से बने पकवान अर्पित किए जाते हैं। भगवान विष्णु और शिव को सफेद पुष्प, दूध और मिठाई चढ़ाना शुभ माना जाता है। फाल्गुन अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठानों का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सामाजिक उत्तरदायित्व का अवसर भी है। इस दिन दान-पुण्य और सेवा कार्य समाज में सहानुभूति और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अमावस्या की रात्रि ध्यान और साधना के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है। यह समय आत्मनिरीक्षण और सकारात्मक संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है।

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