Anmol Vachan : जीवन की सार्थकता इस बात में नहीं है कि हमें क्या मिला है, बल्कि इस बात में है कि हमने उपलब्ध संसाधनों और रिश्तों को कैसे संजोया है। महान विभूतियों और संतों के अनुभव हमें सिखाते हैं कि एक शानदार जीवन बाहरी चकाचौंध से नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और अनुशासन से निर्मित होता है।
अक्सर हम अपनी असफलताओं का दोष भाग्य या ईश्वर पर मढ़ देते हैं, जबकि असलियत में हमारे विचार और कर्म ही हमारे सुख-दुख की पटकथा लिखते हैं। चाहे वह राष्ट्र संत चंद्रप्रभ के वाणी की मधुरता के सूत्र हों या फ्लोरेंस नाइटिंगेल का ईमानदारी और साहस का संदेश, ये सभी हमें एक ही दिशा में ले जाते हैं—स्वयं में सुधार। यदि आप भी अपने जीवन को एक कीमती उपहार मानकर उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं, तो महापुरुषों के ये अनमोल विचार आपके लिए पथ-प्रदर्शक बनेंगे।
किसी के प्रति अपने मन में बुरा भाव न रखें। अपने भाग्य का रोना ही नहीं रोते रहें। सबसे अपने संबंध मधुर बनाकर रखें। समय की कीमत समझें। अपने पर आत्मविश्वास बना कर रखें। गलत-सही हम स्वयं करते हैं लेकिन उसका दोष दूसरों पर लगाते हैं, कहते हैं कि भगवान ने ऐसा किया है।
सबसे मीठा बोलो। तोता मिर्ची खाकर भी मीठा बोलता है। मनुष्य शक्कर खाकर भी कड़वा बोलता है। रावण ने कड़वे बोल बोलकर अपने भाई को अपना ही दुश्मन बना लिया। प्रभु श्रीराम ने रावण के भाई विभीषण को भी अपनी शरण दी।
—राष्ट्र संत चंद्र प्रभ
मैंने कभी बहाने नहीं बनाए। डर के साथ जीवन में कुछ नहीं किया जा सकता। मैं अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी और दिल लगाकर करती हूं। हमारा जीवन एक शानदार उपहार है। स्वर्ग को धरती पर ही बनाएं। जो आप की बात न मानता हो, उसके साथ फिजूल बहस न करें। बहसबाजी अच्छी नहीं होती।
— लोरैंस नाईटिंगेल

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