भोपाल। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि जनता की सेवा से बड़ा कोई कार्य नहीं है। गरीबों की मदद करना, उनके सुख-दुख में सहभागी बनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना ही जनप्रतिनिधि की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार विकास और जनकल्याण को साथ लेकर निरंतर कार्य कर रही है।
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होते हुए राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बावड़ियाकला स्थित इंडस गार्डन फेस-1 में आयोजित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में पौधरोपण किया। इसके बाद वार्ड-68 के किरण नगर, निजामुद्दीन कॉलोनी में आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर में सैकड़ों जरूरतमंद महिलाओं को साड़ियां वितरित कीं।
पौधरोपण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती गौर ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति और मातृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। यदि युवा पीढ़ी वृक्षों के महत्व को समझकर इस अभियान से जुड़ेगी, तो इसका सकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए हरियाली का विनाश उचित नहीं है और जलवायु परिवर्तन तथा प्राकृतिक आपदाएं पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी के गंभीर परिणाम हैं।
स्वास्थ्य शिविर में महिलाओं को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री ने कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग की सेवा करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का दायित्व है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
कार्यक्रमों में मंडल अध्यक्ष मोनिका ठाकुर, पार्षद श्रीमती शीला पाटीदार, श्रीमती अर्चना परमार, प्रताप वारे, धर्मेंद्र परिहार, पार्षद श्रीमती उर्मिला मोर्य, लवकुश यादव, भीकम सिंह बघेल, देवेंद्र योगी, जेपी पाल सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

Related Posts
राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलकर बदले नरोत्तम के सुर, बोले-“BJP में ही जन्मा हूं और BJP में ही मरूंगा…”
सीएम डॉ. मोहन यादव ने लाड़ली बहनों के खातों में ट्रांसफर किए 1835 करोड़
देश की प्रचलित व्यवस्था के खिलाफ है यूसीसी