September 14, 2026

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जल्द विदा होगा दक्षिण-पश्चिम मानसून : 19 सितम्बर से मानसून की वापसी के संकेत, 15 फीसदी कम हुई बारिश

Udaan Desk. देश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी जल्द शुरू हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को बताया कि पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए मौसम की स्थिति अनुकूल बन रही है। इसके करीब 19 सितंबर, 2026 से शुरू होने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी को ही देश की मुख्य भूमि से इसकी विदाई की शुरुआत माना जाता है।

मानसून हर साल केरल के रास्ते भारत में पहुंचता है और अगले करीब चार महीनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय रहता है। इसके बाद इसकी वापसी का सिलसिला सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान के दूर-दराज के इलाकों से शुरू होता है।

बारिश में कितनी कमी, कहां सबसे ज्यादा असर
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 13 सितंबर के बीच देश में सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश हुई। सबसे ज्यादा कमी दक्षिणी प्रायद्वीपीय इलाकों में रही, जहां बारिश सामान्य से 28 फीसदी कम दर्ज की गई। इसके बाद पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 25 फीसदी की कमी रही।

इस साल मानसून की शुरुआत ही कमजोर रही थी। जून 2026 में देशभर में बारिश सामान्य से 36.5 फीसदी कम हुई। इसका असर खरीफ फसलों की बोआई पर भी पड़ा। जून के अंत तक पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बोआई का क्षेत्र करीब 21 फीसदी कम था।

हालांकि, जुलाई और अगस्त में बारिश की स्थिति सुधरी और इससे पूरे सीजन में बारिश की कमी कुछ कम हुई। जुलाई में तो देशभर में बारिश सामान्य से 1 फीसदी ज्यादा रही। इसके बावजूद कई इलाकों में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से मानसून सीजन की कुल कमी करीब 15 फीसदी पर बनी हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की कमी शून्य से लेकर 35 फीसदी तक रही।

फसलों और जलाशयों पर क्या असर
जून के अंत तक पिछड़ रही खरीफ फसलों की बोआई ने जुलाई और अगस्त में रफ्तार पकड़ ली। 11 सितंबर तक सभी फसलों का कुल बोआई क्षेत्र पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 1.45 फीसदी कम रहा। वहीं, पिछले पांच साल के औसत क्षेत्र की तुलना में यह कमी 0.72 फीसदी रही।

फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उड़द, मूंग, सोयाबीन और कपास की बोआई का रकबा पिछले पांच साल के औसत से काफी कम है। इन फसलों में आगे चलकर कीमतों पर दबाव बनने की आशंका ज्यादा है। हालांकि, चावल के मामले में स्थिति अलग है। केंद्र के पास चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिसका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर कीमतों को काबू में रखने के लिए किया जा सकता है।

देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर भी चिंता बढ़ाने वाला है। 3 सितंबर तक देश के करीब 178 प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडार 129.87 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) रहा। यह पिछले साल के 159.18 BCM के मुकाबले काफी कम है। इतना ही नहीं, यह पिछले 10 साल के औसत 134.233 BCM से भी नीचे है।

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