April 17, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

हरियाणा में खेलों का बदलता ट्रेंड, कुश्ती-कबड्डी के साथ फुटबॉल और वॉलीबाॅल का बढ़ता क्रेज

 चंडीगढ़

हरियाणा लंबे समय से कुश्ती और कबड्डी खेल के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब प्रदेश में खेलों का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है और खिलाड़ियों की एक नई पौध तैयार हो रही है। नए सत्र 2026-27 के लिए खेल विभाग की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक खेलों के साथ-साथ फुटबॉल और वॉलीबाॅल का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इन खेलों की नर्सरियों की संख्या भी लगातार बढ़ाई जा रही है और युवा खिलाड़ियों का रुझान इनकी ओर साफ दिखाई दे रहा है। प्रत्येक नर्सरी में 25 खिलाड़ी खेलते हैं।

प्रदेशभर में इस बार 1063 खेल नर्सरियां अलॉट की गई हैं, जो पिछले साल की 976 नर्सरियों से 87 ज्यादा हैं। लेकिन सरकार की ओर से कुल 2 हजार नर्सरियों के संचालित करवाने का लक्ष्य है। इन नर्सरियों के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही ट्रेनिंग दी जाएगी। अब भी कबड्डी 148 नर्सरियों के साथ टॉप पर है, लेकिन फुटबॉल (69) और वॉलीबाॅल (64) तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। कुश्ती की 74 नर्सरियां हैं। अन्य खेलों की बढ़ती संख्या बताती है कि युवाओं की पसंद और नजरिया अब बदल रहा है।

फुटबॉल-वॉलीबाॅल के क्रेज बढ़ने के मुख्य वजह
हरियाणा में फुटबॉल कोच हरविंदर सिंह के मुताबिक इस बदलाव के पीछे सबसे पहली वजह प्रदेश के स्कूल और कॉलेज स्तर पर इन खेलों को ज्यादा बढ़ावा मिलना है। गांवों में भी अब फुटबॉल और वॉलीबाॅल के मैदान आसानी से तैयार हो जाते हैं। इससे बच्चों की भागीदारी बढ़ी है। इसी तरह दूसरी वजह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के लिए तेजी से बढ़ते मौके भी है।

फुटबॉल और वॉलीबाॅल में करियर के विकल्प बढ़ने से युवा इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और टीवी पर बड़े टूर्नामेंट देखने से भी बच्चों में इन खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है। वहीं, तीसरी अहम वजह इन खेलों में कम खर्च और आसान संसाधन है, जहां कुश्ती के लिए अखाड़ा और विशेष व्यवस्था चाहिए, इसी तरह दूसरे खेलों में संसाधनों की व्यवस्था पर भारी खर्च है। वहीं फुटबॉल और वॉलीबाॅल कम संसाधनों में भी खेले जा सकते हैं।

जिलों में भी दिखा नया ट्रेंड
खेल नर्सरियों के आंकड़ों में भी यह बदलाव साफ नजर आता है। हिसार 119 नर्सरियों के साथ सबसे बड़ा स्पोर्ट्स हब बनकर उभरा है, जबकि जींद 108 के साथ दूसरे स्थान पर है। कैथल, भिवानी, करनाल और रोहतक जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नर्सरियां अलॉट की गई हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला अभी पीछे हैं, जबकि सबसे पीछे नूंह है।

इन जिलों में इतनी नर्सरियां अलॉट
हिसार –     119
जीद –        108
कैथल –        82
भिवानी –      67
करनाल –     75
रोहतक –     65
सोनीपत –     65
झज्जर –        28
यमुनानगर –   28
दादरी –         25
अंबाला –        22
पंचकूला –      18
नूंह –             12

 

Spread the love