अंकारा
तुर्की ने हाल ही में इस्तांबुल में रक्षा और एयरोस्पेस प्रदर्शनी में अपनी नई यिल्दिरिमहान इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का अनावरण किया है। मिसाइल का परीक्षण इस साल के आखिर में किया जाएगा। तुर्की का कहना है कि यह मिसाइल मैक 25 की गति से 3,000 किलोग्राम वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। तुर्की के दावे सही हैं तो यह मिसाइल यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और भारत को निशाना बना सकती है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा है कि यह भारत के लिए चिंता का सबब है क्योंकि तुर्की प्रेसिडेंट रेसेप तैयप एर्दोगन ने पश्चिम एशिया से आगे बढ़ते हुए कश्मीरी अलगाववादी आंदोलन को अपना मुद्दा बना लिया है।
विदेश नीति के जानकार माइकल रुबिन ने संडे गार्डियन में अपने लेख में कहा है कि भारतीय अधिकारियों को तुर्की से यह सवाल पूछना चाहिए कि उनको इतनी लंबी मारक क्षमता की मिसाइल की जरूरत क्यों है। तुर्की के प्रतिद्वंद्वी- ग्रीस, साइप्रस, इजरायल, मिस्र, आर्मेनिया और ईरान तो पहले ही उसकी टायफून मिसाइलों की मारक सीमा के भीतर आते हैं।
तुर्की को क्यों है मिसाइल की जरूरत
रुबिन का कहना है कि अपनी सीमाओं के पास हमला करने के लिए ICBM विकसित नहीं की जाती है। इस बात की संभावना नहीं है कि तुर्की को आइसलैंड या इंडोनेशिया पर हमले की जरूरत पड़ेगी। नाटो सदस्य होने के नाते तुर्की को रूस का मुकाबला करने के लिए अपनी खुद की लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की जरूरत नहीं है। ऐसे में भारत ही तुर्की का संभावित लक्ष्य बचता है।
रेसेप तैयप एर्दोगन ने इस्तांबुल मेयर और तुर्की के राष्ट्रपति के तौर पर खुद को 'इस्लामी शासन' को बढ़ावा देने वाले के तौर पर पेश किया है। वह खुद को शरिया का सेवक बता चुके हैं। तुर्की में मजबूत होने के बाद से एर्दोगन ने दुनिया में अपनी महत्वाकांक्षा दिखाई है। उन्होंने ना सिर्फ पश्चिम एशिया में पैर फैलाए हैं बल्कि एशिया पर भी नजर जमा रखी ह
कश्मीर पर एर्दोगन की नजर!
रुबिन का दावा है कि एर्दोगन की इस्लामी महत्वाकांक्षा पश्चिम एशिया से आगे बढ़ते हुए कश्मीरी अलगाववादी आंदोलन तक आ गई हैं। उनका मानना है कि कश्मीरी में अलगाववाद और आतंकवाद जायज है। साल 2020 में एर्दोगन ने जोर देकर कहा था कि कश्मीर हमारे लिए उतना ही नजदीक है जितना तुर्की हमारे लिए है।
एर्दोगन ने कश्मीर को एक ज्वलंत मुद्दा बताया है। तुर्की ने कश्मीरी छात्रों को स्कॉलरशिप देना बढ़ा दिया है ताकि उन्हें तुर्की-शैली के इस्लामी विचारों में ढाला जा सके और शायद उन्हें सैन्य प्रशिक्षण भी दिया जा सके। एर्दोगन जिस तरह से नव-ओटोमनवाद को बढ़ावा देते हैं, उसी तरह वे इसमें विश्वास रखते हैं कि भारत पर मुसलमानों का शासन होना चाहिए।
पाकिस्तान के जरिए भारत पर निशाना
हालिया समय में कश्मीर को लेकर तुर्की के बयानों में नरमी देखी गई है। इसे किसी बड़े तूफान से पहले की शांति भी कहा जा सकता है। तुर्की शायद भारत पर सीधे हमला ना करे लेकिन वह पाकिस्तान की रक्षा और कश्मीर से जुड़े आतंकी गुटों के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई को रोकने के लिए अपनी मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है।

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