भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों और विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियों को लेकर भाजपा के भीतर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। करीब 70 पदों पर नियुक्तियां होने के बाद अब भी 150 से ज्यादा नेताओं की नजर बाकी खाली पदों पर टिकी हुई है। पार्टी के अंदर वरिष्ठ नेताओं से लेकर क्षेत्रीय पदाधिकारियों तक में समायोजन को लेकर जबरदस्त बेचैनी देखी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे कई विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियां हो चुकी हैं, लेकिन भोपाल, इंदौर, खजुराहो और ओरछा विकास प्राधिकरण सहित कई अहम संस्थानों में अब तक नाम तय नहीं हो पाए हैं। यही वजह है कि संगठन और सत्ता के गलियारों में लगातार लॉबिंग और खींचतान की चर्चाएं चल रही हैं।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने फिलहाल नियुक्तियों की प्रक्रिया पर कुछ समय के लिए विराम के संकेत दिए हैं। बताया जा रहा है कि लगातार बढ़ती अंदरूनी नाराजगी और संगठनात्मक संतुलन को देखते हुए पार्टी अब सावधानी से कदम बढ़ाना चाहती है।
वहीं पार्टी के भीतर प्रदेश कार्यसमिति को लेकर भी मंथन जारी है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रदेश नेतृत्व के बीच कई दौर की बैठकों में संभावित नामों पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व की अंतिम सहमति का इंतजार किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निगम-मंडलों की नियुक्तियां केवल प्रशासनिक फैसले नहीं होतीं, बल्कि संगठनात्मक शक्ति संतुलन का बड़ा माध्यम भी होती हैं। ऐसे में हर नियुक्ति के पीछे क्षेत्रीय समीकरण, जातीय संतुलन और राजनीतिक वफादारी का गणित भी जुड़ा रहता है।
प्रदेश भाजपा में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अगली सूची में किन नेताओं को मौका मिलता है और किनकी राजनीतिक नाराजगी और बढ़ती है।

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