उड़ान डेस्क। फोर्स्ड लेबर जांच के बाद अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 10% का नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया. यह फैसला सेक्शन 301 के तहत कई महीनों तक चली जांच के बाद लिया गया है. शुरुआत में भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम फैसला 10% पर हुआ. इसी दर पर पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और कई एशियाई व लैटिन अमेरिकी देशों को भी रखा गया है. अमेरिका ने कुल 60 देशों पर यह टैरिफ लगाया है. इन देशों पर आरोप है कि उन्होंने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए. नया टैरिफ फरवरी में लगाए गए अस्थायी 10% वैश्विक शुल्क की जगह लेगा.
क्या है सेक्शन 301 और क्यों हुई कार्रवाई?
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने कहा कि यह कदम ह्यूमन राइट्स की रक्षा और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है. सेक्शन 301, अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 का एक प्रावधान है, जिसके तहत अमेरिका उन देशों पर व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है, जिन पर अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापारिक गतिविधियों का आरोप हो. ट्रंप प्रशासन ने मार्च में फोर्स्ड लेबर और अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में भारत के खिलाफ जांच शुरू की थी. इनमें से फोर्स्ड लेबर वाली जांच पूरी हो चुकी है, जबकि अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से जुड़ी जांच अभी भी जारी है.
भारत ने रखा अपना पक्ष, व्यापार समझौते पर भी बातचीत जारी
जांच के दौरान भारत सरकार और उद्योग संगठनों ने कहा था कि देश में जबरन मजदूरी पर रोक लगाने के लिए संविधान समेत कई कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद हैं. इस बीच भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत जारी है. फरवरी में दोनों देशों ने एक ढांचे पर सहमति बनाई थी, जिसके तहत भारतीय निर्यात पर कुल टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने की बात हुई थी. इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने और अमेरिकी उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देने का प्रस्ताव रखा था.
दूसरी जांच बनी भारत की चिंता, निर्यात पर पड़ सकता है असर
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि 18% टैरिफ भारत के लिए प्रतिस्पर्धी बढ़त दे सकता है. हालांकि, बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के वैश्विक रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर दिया, जिससे इस व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई. भारत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उस पर सेक्शन 301 के तहत दो अलग-अलग जांच चल रही हैं, जबकि पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे कई प्रतिस्पर्धी देशों पर केवल फोर्स्ड लेबर वाली जांच है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन देशों पर कुल टैरिफ भारत से कम रहा, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है. ट्रेड विशेषज्ञ मार्क लिंस्कॉट के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की शर्तों पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है, लेकिन भारत चाहता है कि उसे दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले स्पष्ट रूप से बेहतर टैरिफ का लाभ मिले.

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