चंडीगढ़.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को राजस्थान से पिछले 66 वर्षों के पानी के उपयोग के लिए लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि मांगी और भुगतान न करने पर पानी रोकने की चेतावनी दी थी। सीएम भगवंत मान के इस बयान के बाद राजस्थान ने पलटवार किया है।
राजस्थान जल संसाधन विभाग के अनुसार, पंजाब जिस समझौते का हवाला दे रहा है, उसका वर्तमान परिदृश्य में कोई कानूनी आधार नहीं है। यह समझौता वर्ष 1920 में बहावलपुर रियासत ( अब पाकिस्तान में) और ब्रिटिश सरकार के बीच हुआ था न कि वर्तमान राजस्थान एवं पंजाब के बीच। आजादी के बाद परिस्थितियां पूरी तरह से बदल गई हैं। रियासतों का विलय होने के बाद नए राज्यों का गठन हो गया। इसके बाद वर्ष 1955, 1958 व 1988 में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे से जुड़े नए समझौते हो गए। इन समझौतों में किसी तरह के भुगतान का प्रविधान नहीं है। राजस्थान और पंजाब के बीच जल बंटवारे का विवाद पहले से ही न्यायाधिकरण में लंबित है। अगले कुछ दिन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस संबंध में केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का पक्ष रखेंगे।

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