सिंगापुर के पूर्व विदेश सचिव और राजदूत बिलहारी कौसिकन ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति पर जो टिप्पणी की है, उसने इस्लामाबाद के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। कौसिकन ने कहा कि पाकिस्तान ऐसा मुल्क है जो हमेशा नाकामी की कगार पर खड़ा रहता है।
उन्होंने बेहद कड़वे शब्दों में कहा कि पाकिस्तान की कूटनीति, उसकी जर्जर होती अर्थव्यवस्था और सेना की राजनीति में दखलंदाजी ही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन है।
पाकिस्तान की एकमात्र ढाल?
कौसिकन का सबसे तीखा प्रहार पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूरी दुनिया पाकिस्तान को लेकर सिर्फ इसलिए चिंतित रहती है क्योंकि उसके पास परमाणु हथियार हैं।
उनका मानना था कि यदि पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश नहीं होता, तो दुनिया के किसी भी देश को उसके ढह जाने या उसके अस्तित्व के होने या न होने की कोई परवाह नहीं होती। उनके अनुसार, ये हथियार ही हैं जिसने पाकिस्तान को दुनिया की नजरों में बनाए रखा है, न कि उसकी कोई उपलब्धि।
लोगों का पेट नहीं भर पा रहा पाकिस्तान
हाल के समय में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में खुद को एक ‘शांतिदूत’ के तौर पर पेश करने की कोशिश की है। इस पर तंज कसते हुए सिंगापुर के पूर्व राजदूत ने कहा कि कूटनीतिक सफलताएं अच्छी लग सकती हैं, लेकिन इनसे पाकिस्तान के लोगों का पेट नहीं भरता।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की असली समस्या कूटनीतिक नहीं बल्कि उसकी बुनियाद में छिपा कुप्रबंधन है। जिहादी गुटों को बेलगाम छोड़ना और अर्थव्यवस्था का गलत प्रबंधन आज पाकिस्तान को इस मोड़ पर ले आया है।
मैडम सो रही है, उन्हें डिस्टर्ब नहीं कर सकते
जब पाकिस्तानी पत्रकारों ने देश की समस्याओं के लिए भारत, अफगानिस्तान और ईरान के से जुड़े हुए भूगोल को जिम्मेदार ठहराया, तो कौसिकन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भूगोल को दोष देना महज एक बहाना है।
उन्होंने एक कहानी सुनाते हुए कहा कि जब 1991 में सिंगापुर एयरलाइंस के अपहरण के दौरान तत्कालीन नेता बेनजीर भुट्टो के नौकर ने यह कहकर फोन काट दिया कि ‘मैडम सो रही हैं, उन्हें डिस्टर्ब नहीं किया जा सकता।
2026 की भयानक आर्थिक हकीकत
पूर्व राजदूत की ये बातें जुलाई 2026 के आर्थिक आंकड़ों से मेल खाती हैं। वर्तमान में पाकिस्तान में महंगाई 12% के खतरनाक स्तर पर है और आर्थिक विकास दर महज़ 2.33% रह गई है।
हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने IMF की शर्तों को पूरा करने के लिए $61 बिलियन का जो नया बजट पेश किया है, उसका सारा बोझ वहां की आम जनता और छोटे व्यापारियों पर डाल दिया गया है। विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं, जिससे मुल्क की हालत और भी गंभीर होती जा रही है।

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