नईदिल्ली। दिल्ली सरकार महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को बिना गारंटी 10 करोड़ रुपये तक का कर्ज दिला रही है। पैसा सरकार नहीं, बैंक देगा, गारंटी सरकार उठाएगी। कौन पात्र है, किस बैंक में जाना है, कौन-से कागज चाहिए और आवेदन का सही तरीका क्या है, आइए जानते हैं पूरी व्यावहारिक जानकारी।
दिल्ली में अपना कारोबार शुरू करने की सोच रही या पहले से कोई बिजनेस कर रही महिला के लिए यह खबर सीधे काम की है। दिल्ली सरकार ने महिलाओं की अगुवाई वाले स्टार्टअप और स्वयं सहायता समूहों को बिना किसी गिरवी या गारंटी के 10 करोड़ रुपये तक का कर्ज दिलाने का रास्ता खोल दिया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रोहिणी में आयोजित दो दिवसीय मेगा एसएचजी मेला 2026 में यह घोषणा की। सबसे बड़ी बात है कि कर्ज न चुका पाने की स्थिति में गारंटी खुद सरकार देगी, उद्यमी को संपत्ति गिरवी रखने की जरूरत नहीं। लेकिन योजना का लाभ तभी मिलेगा जब आप सही दरवाजा खटखटाएं और सही तैयारी के साथ जाएं।
योजना है क्या, और पैसा आता कहां से है?
इस योजना को समझने का सबसे जरूरी बिंदु यही है कि कर्ज दिल्ली सरकार के खाते से नहीं आता। कर्ज बैंक देता है। आम तौर पर बैंक बड़ा लोन देने से पहले संपत्ति गिरवी या किसी की गारंटी मांगता है। यही छोटे और महिला उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी रुकावट रही है। इस योजना में वह रुकावट हटा दी गई है।
दिल्ली सरकार ने केंद्र के ‘क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज’ (CGTMSE) के साथ समझौता किया है और 50 करोड़ रुपये का अलग गारंटी फंड बनाया है। मतलब, अगर कारोबारी कर्ज नहीं चुका पाता, तो उसका बड़ा हिस्सा केंद्र की गारंटी से और बाकी दिल्ली सरकार के फंड से भरा जाएगा। बैंक का जोखिम घटता है, इसलिए वह बिना गिरवी कर्ज देने को तैयार होता है।
किन महिलाओं के लिए यह सबसे ज्यादा काम का है?
अगर आप नया स्टार्टअप शुरू करना चाहती हैं, चाहे मैन्युफैक्चरिंग हो, सर्विस, रिटेल, स्किल ट्रेनिंग या टेक्नोलॉजी, तो शुरुआती पूंजी की सबसे बड़ी अड़चन यहां हल होती है, क्योंकि गारंटी देने वाला कोई न होने पर भी कर्ज मिल सकता है।
और अगर आप पहले से कोई छोटा कारोबार या स्वयं सहायता समूह चला रही हैं और उसे बड़ा करना चाहती हैं, नई मशीन, ज्यादा कच्चा माल, बड़ा स्टाफ या नई दुकान की जरूरत पड़ेगी। इस विस्तार के लिए वर्किंग कैपिटल इसी रास्ते से जुटाया जा सकता है। महिला-स्वामित्व वाले छोटे उद्यमों को CGTMSE के तहत 80% तक का गारंटी कवर मिलता है, जो आम आवेदकों से ज्यादा है। यानी बैंक के लिए ऐसा प्रस्ताव और सुरक्षित होता है।
आवेदन कैसे करें?
सबसे पहले अपने कारोबार को औपचारिक रूप दीजिए। उद्यम (Udyam) पोर्टल पर मुफ्त MSME रजिस्ट्रेशन कराइए। यह लगभग हर सरकारी लोन योजना की पहली शर्त है। इसके बाद एक साफ बिजनेस प्लान बनाइए जिसमें बताया गया हो कि पैसा किस काम में लगेगा, कमाई कैसे होगी और कर्ज कैसे चुकाया जाएगा।
फिर किसी ऐसे बैंक की शाखा में जाइए जो CGTMSE का सदस्य हो। लगभग सभी बड़े सरकारी और निजी बैंक इसमें शामिल हैं। पूरी सूची यहां देखी जा सकती है। बैंक में ‘बिना गारंटी, सीजीटीएमएसई कवर के तहत’ लोन की स्पष्ट मांग कीजिए। बैंक प्रस्ताव की जांच कर कर्ज मंजूर करता है और फिर खुद CGTMSE से गारंटी कवर लेता है। यह काम बैंक करता है, आपको नहीं करना है।
कौन-से कागज और किस बात का ध्यान रखें
पहचान और पते के दस्तावेज, उद्यम रजिस्ट्रेशन, बैंक स्टेटमेंट, बिजनेस प्लान और पुराने कारोबार के लिए पिछले कुछ साल का हिसाब साथ रखिए। एक ज़रूरी सावधानी बरतनी है कि स्वयं सहायता समूहों और कुछ श्रेणियों के लिए मानक CGTMSE नियमों में अलग शर्तें होती हैं, इसलिए स्वयंसहायता समूह (SHG) सदस्य अपने बैंक लिंकेज और दिल्ली सरकार की मेला/उद्योग विभाग की हेल्प डेस्क से अपनी पात्रता और सही विंडो जरूर पुष्टि कर लें। साथ ही, किसी एजेंट के झांसे में न आएं। CGTMSE खुद कोई कर्ज, सब्सिडी या एजेंट नहीं रखता। आवेदन सीधे बैंक के ज़रिए ही होता है।
उत्पाद बेचने का मंच भी
कर्ज के अलावा एक और व्यावहारिक मदद यह है कि महिलाओं के बनाए स्वदेशी उत्पादों हस्तशिल्प, खादी, घरेलू और खाद्य सामग्री को शहर के मॉल और बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में बिक्री के लिए विशेष मंच दिए जाएंगे। रोहिणी के मेगा एसएचजी मेले जैसे आयोजन भी सीधे ग्राहक तक पहुंचने और ऑर्डर पाने का मौका देते हैं, इसलिए ऐसे मेलों में स्टॉल और रजिस्ट्रेशन पर नजर रखना फायदेमंद रहेगा।
यह योजना पूंजी की उस दीवार को तोड़ती है जो अक्सर महिला उद्यमियों को आगे बढ़ने से रोकती थी। फायदा उन्हीं को मिलेगा जो उद्यम रजिस्ट्रेशन, ठोस बिजनेस प्लान और सही बैंक के साथ तैयारी से जाएं। नया कारोबार हो या पुराने का विस्तार, सही दस्तावेज और स्पष्ट योजना ही इस मौके को असली मदद में बदलेंगे।

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