स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भले ही इस समय सप्लाई सामान्य हो चुकी है, लेकिन ईरान की तरफ से नेविगेशन शुल्क वसूलने के ऐलान ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। किस देश पर शुल्क लगेगा या नहीं इन खबरों के बीच भारतीय ध्वज वाले 15 जहाज उर्वरक लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को क्रॉस कर चुके हैं। भारत के रसायन और उर्वरक मंत्रालय की तरफ से यह खबर दी गई। जो किसानों और उर्वरक व्यापारियों के लिए बड़ी राहत के जैसे हैं। लेकिन सवाल अभी भी यह है कि क्या भारत को नेवीगेशनल शुल्क देना पड़ेगा?
हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी 5 और जहाज होर्मूज से निकलने की बारी का इंतजार कर रहे हैं।
जो 15 जहाज निकले हैं, उनमें से 8 जहाजों पर 3.32 लाख टन यूरिया हैं। 4 पर 2.57 लाख टन डीएपी है और 3 जहाज पर 1.11 लाख टन सल्फर है।
जो पांच जहाज फंसे हुए उसमें से एक अमोनिया और दूसरा यूरिया से लदा हुआ है। हालांकि भारत सरकार की तरफ से यह भी कहा गया है कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही यह पांच जहाज भी प्रमुख जलमार्गों को पार कर जाएंगे।
नेवीगेशनल शुल्क वसूलेगा ईरान
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में ईरान को 60 दिन की मोहलत दी गई है जिसमें ईरान बिना किसी रूकावट के तेल बेच सकेगा और इस दौरान वह जलमार्गों पर जहाजों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं वसूलेगा। लेकिन ईरान ने ऐलान किया है कि वह कमर्शियल जहाज से नेवीगेशनल शुल्क वसूलेगा। इस ऐलान से कई देशों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार महंगा हो सकता है।
क्या भारत पर भी लगेगी शुल्क?
भारतीय जहाजों पर शुल्क लगेगी या नहीं यह अभी तक तय नहीं हुआ है। हालांकि ईरान की तरफ से यह संकेत दिया गया है कि उनके मित्र देशों के जहाजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भारत को भी नेवीगेशनल शुल्क से छूट मिल सकती है।

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