मैहर। मां शारदा देवी का पवित्र तीर्थ स्थल मैहर (मध्यप्रदेश) में इनदिनों आस्था और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। चेत्र नवरात्र के अवसर पर मां शारदा का आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सुबह सूरज निकलने से पहले ही यहां भक्तों का सैलाब देखते ही बन रहा है, भक्तों के आने-जाने का यह सिलसिला देर शाम तक बना हुआ है। श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए त्रिकूट पर्वत की ऊंची पहाड़ी पर विराजमान मां शारदा के दर्शन करने और माता के दरबार में माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं।
आस्था और भक्ति का अनोखा संगम
वैसे तो मां शारदा के दरबार में साल के बारह महीनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, परंतु नवरात्र पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया गया है, जो 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक जारी रहेगा। पवित्र नगरी मैहर में नौ दिनों तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस मेले के चलते आस्था और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। यहां पहुंचने वाले भक्तों की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन की ओर से भी बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं।
चैत्र नवरात्रि पर दर्शन का विशेष महत्व
मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के दिनों मां शारदा के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख समृद्धि आती है। चैत्र नवरात्रि को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। देवी दुर्गा ने इसी काल में राक्षस महिषासुर का वध किया था, इसलिए देशभर में इस पर्व को बहुत ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। मां शारदा धाम और मंदिर को प्राचीन शक्तिपीठों में प्रमुख माना जाता है, इसलिए मैहर में इस पर्व का उत्साह कहीं ज्यादा देखने को मिलता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर रामनवमी तक चलने वाला यह मेला वर्षों पुरानी परंपरा है, जो अनवरत जारी है।
सुबह से शाम तक भक्तों की लंबी कतारें
मैहर वाली मां शारदा धाम में सुबह 3.30 बजे मंदिर के पट खुलते ही विशेष आरती और पूजा शुरू हो जाती है और यहां पूरे दिन और शाम को 7.30 बजे विशेष आरती होने तक भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार वीर योद्धा आल्हा और ऊदल मां शारदा के परम भक्त थे। कहा जाता है कि आज भी सबसे पहले मां का श्रृंगार और पूजा आल्हा ही करते हैं। यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक आस्था का भी केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि त्रिकूट पर्वत पर स्थित इस मंदिर में मां शारदा स्वयं प्रकट हुई थीं। यहां स्थापित विग्रह को जगतजननी के साक्षात रूप के तौर पर पूजा जाता है। किंवदंती है कि आल्हा-ऊदल भी मां शारदा के परम भक्त थे। युद्ध पर जाने से पहले वे मां के दर्शन कर आशीर्वाद लेते थे। आज भी मंदिर प्रांगण में स्थित आल्हा अखाड़ा इसका प्रमाण है। मान्यता है कि मां के दरबार में हाजिरी लगाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
रोप-वे से प्राकृतिक नजारे का लुत्फ
ऊंची पहाड़ी पर विराजमान मां शादरा धाम में पहुंचकर श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति तो कर ही रहे हैं, पहाड़ी में रोप-वे से होकर जाते हुए यहां के मनोरम और प्राकृतिक नजारे का लुत्फ भी उठा रहे हैं। यहां रोप-वे की भी व्यवस्था है जहां निर्धारित शुल्क चुकाकर श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के मंदिर तक पहुंचते हैं। इसके अलावा टैक्सी के जरिए भी मंदिर तक पहुंचने की व्यवस्था है। हालांकि, बड़ी संख्या में भक्त सीढिय़ों से होकर भी मंदिर तक पहुंंचते हैं, जो उनकी मांं शारदा के प्रति अपनी अटूट आस्था-भक्ति को दर्शाता है।

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