कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने पर खुदरा महंगाई दर छह फीसदी से ज्यादा हो सकती है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तय दायरे की ऊपरी सीमा है और इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। विदेशी ब्रोकरेज HSBC (Foreign Brokerage HSBC) ने यह अनुमान जताया है।
तेल महंगा तो महंगाई-ब्याज दर बढ़ेंगी
HSBC के अर्थशास्त्रियों ने एक रिपोर्ट में अपने विश्लेषण के आधार पर कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतों का औसत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहता है, तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर छह फीसदी से नीचे बनी रह सकती है। अर्थशास्त्रियों ने कहा, ”यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो महंगाई दर छह फीसदी से ज्यादा हो सकती है और इससे ब्याज दरों में संभवतः बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।”
क्या RBI बढ़ाएगा ब्याज दरें?
अगले बुधवार को द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा से पहले यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या आरबीआई डॉलर के मुकाबलो रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरों के साधन का इस्तेमाल करेगा। इस रिपोर्ट में ऐसे कदम से जुड़े जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट कहती है, ”रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरों का सहारा लेना महंगा पड़ सकता है, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों के साथ आर्थिक वृद्धि पर दबाव तेजी से एवं असमान रूप से बढ़ सकता है।”
‘तटस्थ’ रुख अपनाया जाना चाहिए
अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया कि फिलहाल मौद्रिक एवं राजकोषीय दोनों मोर्चों पर ‘तटस्थ’ रुख अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि सप्लाई की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और मांग को बढ़ावा देने से महंगाई बढ़ सकती है। रिपोर्ट में ‘तटस्थ’ रुख का मतलब स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025-26 के स्तर के आसपास बनाए रखा जाए और पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर इस घाटे को नियंत्रित करने में मदद ली जाए।
इसके साथ ही रिपोर्ट कहती है कि एनर्जी सेक्टर का यह आघात अगर कुछ और सप्ताह तक जारी रहता है, तो इससे आर्थिक वृद्धि पर पड़ने वाला दबाव महंगाई के प्रभाव से ज्यादा हो सकता है।

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