भारत और इजरायल के बीच बाइलेटरल इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट (BIA) अब आधिकारिक तौर पर शनिवार 4 जुलाई से लागू हो गया है। इस डील के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर इन्वेस्टमेंट में तेज़ी आने की उम्मीद है। फाइनेंस मिनिस्ट्री निर्मला सीतारामन् का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के बिजनेस रिश्तों को नई ताकत देगा।
सितंबर 2025 में हुई थी साइनिंग
इस एग्रीमेंट पर 8 सितंबर 2025 को साइन हुए थे। अब इसे लागू कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे निवेशकों को ज्यादा सेफ्टी, ट्रांसपेरेंसी और भरोसा मिलेगा, जिससे नई कंपनियां और बड़े इन्वेस्टर्स निवेश बढ़ा सकते हैं।
क्या है इस डील का सबसे बड़ा फायदा?
इस BIA का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर किसी निवेशक का पैसा किसी वजह से प्रभावित होता है, तो उसे कंपनसेशन और आर्बिट्रेशन का विकल्प मिलेगा। यानी निवेशकों के हितों की रक्षा होगी। साथ ही सरकार ने अपनी पॉलिसी स्पेस भी बचाकर रखी है, ताकि पब्लिक पॉलिसी से जुड़े फैसले लेने में कोई दिक्कत न हो।
800 मिलियन डॉलर का मौजूदा निवेश
अभी भारत और इजरायल के बीच कुल निवेश करीब 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर का है। माना जा रहा है कि इस नए समझौते के बाद यह आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी, AI, डीपटेक और डिफेंस सेक्टर में बड़ा कैपिटल फ्लो देखने को मिल सकता है।
पैसे ट्रांसफर करना होगा आसान
एग्रीमेंट के तहत निवेशकों को प्रॉफिट, डिविडेंड, कैपिटल गेन, रॉयल्टी पेमेंट, टेक्निकल फीस जैसी रकम आसानी से ट्रांसफर करने की अनुमति होगी। यह ट्रांसफर मूल निवेश की करेंसी या किसी दूसरी कन्वर्टिबल करेंसी में हो सकेगा। इससे इंटरनेशनल इन्वेस्टर्स का भरोसा और मजबूत हो सकता है।
किन मामलों में लागू नहीं होगा यह समझौता?
हालांकि भारत-इजरायल BIA निवेशकों को मजबूत सुरक्षा देता है, लेकिन कुछ अहम क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। इसमें टैक्सेशन से जुड़े कानून, सरकारी खरीद (गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट), सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी और ग्रांट, और लोकल गवर्नमेंट के फैसले शामिल हैं। आसान भाषा में समझें तो इन मामलों में अगर कोई बदलाव या विवाद होता है, तो उस पर इस एग्रीमेंट के नियम लागू नहीं होंगे। यानी सरकार इन क्षेत्रों में अपनी पॉलिसी और फैसलों पर पूरा कंट्रोल बनाए रखेगी।

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