May 14, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

सुवेंदु अधिकारी के एक फैसले से बॉर्डर पर हलचल: बांग्लादेश तक बढ़ी बेचैनी, तारिक रहमान के सलाहकार भी परेशान

कोलकत्ता

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के एक फैसले ने पूरे बांग्लादेश में हलचल मचा दी है. सोमवार को हुई नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बिना बाड़ वाले इलाकों में कांटेदार तार लगाने के लिए बीएसएफ को 45 दिनों के भीतर जमीन सौंपने का फैसला लिया गया. इस फैसले के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर प्रतिक्रिया तेज हो गई है।

सुवेंदु सरकार के फैसले पर क्या बोला बांग्लादेश?
सुवेंदु सरकार के इस फैसले पर बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायुं कबीर ने कहा कि ‘बांग्लादेश को कांटेदार तार से डराया नहीं जा सकता.’ उन्होंने कहा कि चुनावी बयानबाजी और शासन चलाना अलग बात है और ढाका अब यह देखना चाहता है कि बंगाल सरकार चुनावी भाषणों को प्रशासनिक फैसलों में कितना बदलती है।

हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि अगर भारत वास्तव में लोगों के बीच रिश्ते मजबूत करना चाहता है तो उसे सीमा विवादों और सुरक्षा मामलों को ‘मानवीय दृष्टिकोण’ से देखना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि बांग्लादेश की प्राथमिक बातचीत भारत की केंद्र सरकार से होती है, न कि किसी राज्य सरकार से।

सीमा पर बांग्लादेशी गार्ड भी अलर्ट
सीमा पर कथित ‘पुश-बैक’ और हिंसा के मुद्दे पर भी बांग्लादेश ने कड़ा रुख दिखाया है. कबीर ने चेतावनी दी कि अगर सीमा पर लोगों की मौतें और जबरन धकेलने की घटनाएं जारी रहीं तो बांग्लादेश चुप नहीं बैठेगा. वहीं बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बल पूरी तरह तैयार है।

दरअसल बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि बंगाल-बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि नई सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही सीमा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा फैसला लिया जाएगा. सोमवार को कैबिनेट की बैठक में उसी वादे को अमल में लाते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन ट्रांसफर का निर्णय लिया गया.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में सरकार बदलने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्मा सकता है. बीजेपी जहां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रही है, वहीं बांग्लादेश इसे कूटनीतिक और मानवीय नजरिए से उठा रहा है।

Spread the love