नई दिल्ली
भारत पिछले कुछ दशक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट से गुजर रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी लंबे युद्ध ने तेल और गैस सहित तमाम सेक्टर पर जबरदस्त असर डाला है. चौतरफा मुश्किलों से घिरे भारत के लिए अगले महीने की शुरुआत से एक राहत भरी खबर आ रही है. भारत और खाड़ी देश ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता 1 जून, 2026 से लागू हो जाएगा. इस समझौते की सबसे खास बात ये है कि ओमान होर्मुज के दायरे से बाहर है तो इस समझौते से भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा मिलने वाला है।
भारत और ओमान के बीच 18 दिसंबर, 2025 को कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) हुआ था, जो 1 जून से प्रभावी हो जाएगा. भारत ने पिछले कुछ समय से ओमान के अलावा कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है. जाहिर है कि इस समझौते से दोनों ही देशों को एक-दूसरे के बाजार में बिना टैरिफ चुकाए अपने सामान बेचने का मौका मिलेगा, लेकिन ओमान इस मामले में कुछ खास है. इसकी सबसे बड़ी वजह उसका होर्मुज के दायरे से बाहर होना. इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच बिना होर्मुज की बाधा के ही कारोबार किया जा सकता है।
एफटीए से क्या होगा फायदा
इस मुक्त व्यापार समझौते में ओमान ने भारत के 98.08 फीसदी सामानों पर टैरिफ खत्म कर दिया है. इससे भारत का ओमान को किया जाने वाला 99.38 फीसदी एक्सपोर्ट पूरी तरह टैरिफ फ्री हो जाएगा. इसका मतलब है कि भारत का लगभग पूरा ही निर्यात टैरिफ फ्री हो जाएगा. भारत ने भी ओमान से आने वाले 77.79 फीसदी सामानों पर टैरिफ खत्म कर दी है, जो कुल आयात का 94.81 फीसदी होता है. भारत ने कुछ संवेदनशील सेक्टर जैसे डेयरी प्रोडक्ट, चॉकलेट और ज्वैलरी सेक्टर को इस एफटीए से बाहर रखा है।
भारत के किस सेक्टर को होगा फायदा
टेक्सटाइल, गारमेंट्स, लेदर, फुटवेयर
जेम्स एंड ज्वेलरी
इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोबाइल्स, प्लास्टिक, फर्नीचर
फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज
एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स (चावल, अनाज आदि)
भारतीय प्रोफेशनल्स की मोबिलिटी आसान होगी और IT, हेल्थकेयर, एजुकेशन, लॉजिस्टिक्स आदि में बेहतर एक्सेस मिलेगा.
ओमान में 100% FDI की सुविधा कई सेक्टरों में मिलेगी.
दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार अभी करीब 10.6 अरब डॉलर है, जबकि इस समझौते से यह बढ़कर 12.5 अरब डॉलर पहुंच सकता है.
होर्मुज संकट में कैसे मददगार
होर्मुज से आवाजाही पर असर की वजह से भारत का आयात काफी प्रभावित हो रहा है. अभी शिपिंग रूट बदलने पड़ रहे, जिससे इंश्योरेंस की कॉस्ट बढ़ रही है और आयात महंगा हो रहा है. ओमान के साथ समझौता होने से वहां के पोर्ट खासकर सलालाह और दुक्म को भारत अपने हब के रूप में इस्तेमाल कर सकता है. यह दोनों पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट से बाहर हैं और हिंद महासागर के रास्ते सीधे जुड़े हुए हैं. भारत इन पोर्ट के जरिये खाड़ी देश, अफ्रीका और यूरोप को अपना सामान भेज भी सकता है और वहां से मंगवा भी सकता है।
कम हो जाएगी होर्मुज पर निर्भरता
ट्रेड मार्केट एक्सपर्ट तो इस समझौते को ओमान ट्रेड कॉरिडोर भी कहने लगे हैं. उनका कहना है कि पेट्रोकेमिकल्स सहित तमाम सामान को ओमान के रास्ते डायवर्ट करके निर्यात अथवा आयात किया जा सकता है. इससे होर्मुज पर निर्भरता कम हो जाएगी और भारत को व्यापार का नया रास्ता मिलेगा. ओमान हमेशा से न्यूट्रल और मीडिएटर की भूमिका निभाता है. इस समझौते से उसका भारत के साथ संबंध तो बेहतर होगा ही, सामान के साथ व्यापार के नए कॉरिडोर को खोलने में भी मदद मिलेगी।

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