May 27, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत, जयशंकर की कूटनीति लाई बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली
ईरान में होर्मुज संकट के बीच एक ऐसी खबर आई है, जो भारत को खुश करने वाली है. दरअसल ईरान में हिरासत में रखे गए 10 भारतीय नाविकों को आखिरकार रिहा कर दिया गया है. ये भारत सरकार की ओर से लगातार हो रही कूटनीतिक कोशिशों के बाद मिली सफलता है. एक लंबी वार्ता और प्रक्रिया के बाद इन नाविकों की सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी है. भारतीय शिपिंग प्राधिकरण के मुताबिक ये नाविक एमवी हार्बर फीनिक्स नाम के तेल टैंकर पर तैनात थे। 

आपको बता दें कि ये मामला जुलाई, 2025 का है, जिसमें ईरान के जास्क पोर्ट के पास इस जहाज को रोके जाने के बाद नाविकों को हिरासत में ले लिया गया था. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने बयान जारी कर कहा कि नाविकों को अब सुरक्षित रूप से रिहा कर दिया गया है और उन्हें वापस भारत लाने की तैयारी की जा रही है. इस मामले कोई भी सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है और बेहद शांति से भारत सरकार ने नाविकों की वापसी सुनिश्चित की है। 

भारत-ईरान के अच्छे संबंधों का सबूत 
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत कूटनीतिक और ऊर्जा संबंध रहे हैं. हालांकि भारत अमेरिका और इजरायल के साथ भी करीबी रिश्ते बनाए रखता है, इसलिए ऐसे मामलों में नई दिल्ली काफी संतुलित और सावधानी भरी नीति अपनाती है. ईरानी सुरक्षा बल अक्सर खाड़ी क्षेत्र में उन जहाजों को पकड़ने का दावा करते हैं, जिन पर अवैध रूप से ईंधन ले जाने का शक होता है. हालांकि भारतीय नाविकों की गिरफ्तारी की सटीक वजह या जहाज से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. शिप ट्रैकिंग वेबसाइट्स के मुताबिक एमवी हार्बर फीनिक्स पलाऊ झंडे वाला एक ऑयल टैंकर है. भारतीय सरकार ने इस पूरे मामले में सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हुए शांत कूटनीति की रणनीति अपनाई. माना जा रहा है कि इसी वजह से बातचीत के जरिए नाविकों की रिहाई का रास्ता निकल पाया। 

होर्मुज पर बना हुआ है संकट 
भारत दुनिया के सबसे बड़े मर्चेंट नेवी कार्यबल वाले देशों में शामिल है. खाड़ी क्षेत्र के समुद्री रास्तों पर हजारों भारतीय नाविक काम करते हैं. वहीं 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी और प्रतिबंध बढ़ा दिए हैं. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी इसी रास्ते से होकर गुजरता है. भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है, अपनी लगभग आधी कच्चे तेल की जरूरत होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए पूरी करता है. हालांकि इस बीच भारत के कई टैंकर होर्मुज से गुजरे हैं. पिछले एक हफ्ते में भारत के लिए एलएनजी ला रहे दो जहाजों ने भी इस रास्ते को क्रॉस किया है, जिसके बाद गैस संकट का दबाव थोड़ा कम जरूर होगा। 

Spread the love