May 28, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

PGI डॉक्टरों की गर्भवती महिलाओं को चेतावनी, तम्बाकू से कैंसर और स्ट्रोक का बढ़ता खतरा

चंडीगढ़.

गुटखा, खैनी और जर्दा जैसे धुआं रहित तंबाकू को लोग अक्सर सिगरेट से कम खतरनाक मानते हैं पर PGI चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने इस संबंध में गंभीर चेतावनी दी है। PGI के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान तंबाकू का सेवन न सिर्फ मां के लिए बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।

इससे बच्चे का वजन कम होना, समय से पहले जन्म और यहां तक ​​कि मृत बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ जाता है। PGI के मुताबिक भारत में करीब 20 करोड़ लोग धुआं रहित तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं। डॉक्टरों के मुताबिक गुटखा, खैनी, जर्दा, पान मसाला और नसवार जैसे उत्पाद सीधे शरीर में निकोटीन और जहरीले केमिकल पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर, दिल की बीमारी और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

PGI स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रो. सोनू गोयल ने बताया कि लोग अभी भी गुटखा और खैनी को सुरक्षित या 'नेचुरल' मानते हैं, जबकि यह पूरी तरह से गलत सोच है। उन्होंने कहा कि तंबाकू के पत्तों में निकोटीन, नाइट्रोसामाइन और कई ऐसे केमिकल होते हैं जो सीधे कैंसर से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकलेस तंबाकू खाने से बच्चे को ऑक्सीजन और जरूरी न्यूट्रिएंट्स की सप्लाई पर असर पड़ता है। इससे बच्चा कमजोर हो सकता है या समय से पहले जन्म का खतरा बढ़ सकता है। कई मामलों में स्टिलबर्थ की संभावना भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू भारत में ओरल कैंसर के मामलों का एक बड़ा कारण बन गया है। एक इंटरनेशनल स्टडी के मुताबिक दुनिया में स्मोकलेस तंबाकू और सुपारी से जुड़े ओरल कैंसर के लगभग 70 प्रतिशत मामले भारत में होते हैं।

धुआं रहित तंबाकू में करीब 4000 केमिकल
पी.जी.आई. के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू सिर्फ मुंह को ही नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि पूरे शरीर पर असर डालता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है और स्ट्रोक की संभावना बढ़ सकती है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि कई लोग वजन बढ़ने के डर से तंबाकू नहीं छोड़ते, लेकिन यह डर काफी हद तक गलत है। रिसर्च के मुताबिक तंबाकू छोड़ने के बाद वजन में थोड़ी बढ़ोतरी होती है, जबकि तंबाकू का इस्तेमाल जारी रखने से कैंसर और दिल की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। PGI के एक्सपर्ट्स ने भी युवाओं और महिलाओं में बढ़ती तंबाकू की लत पर चिंता जताई है।

उनका कहना है कि छोटे पैक में मिलने वाले फ्लेवर्ड पान मसाला और गुटखा प्रोडक्ट्स तेजी से टीनएजर्स और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू में करीब 4000 केमिकल्स पाए जाते हैं, जिनमें से कई सीधे कैंसर का कारण बनते हैं। इनमें आर्सेनिक, लेड, कैडमियम, फॉर्मेल्डिहाइड और रेडियोएक्टिव पोलोनियम-210 जैसे खतरनाक एलिमेंट्स शामिल हैं। PGI ने लोगों से तंबाकू छोड़ने के लिए सरकारी हेल्पलाइन और तंबाकू छोड़ने की सर्विस का इस्तेमाल करने की अपील की है। डॉक्टरों ने कहा कि समय पर तंबाकू छोड़ना कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

Spread the love