May 29, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

टिटहरी के 4 अंडों ने जगाई अच्छी बारिश की उम्मीद

भोपाल 

दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में एक झिरिया के पास हाल ही में टिटहरी (रेड-वॉटल्ड लैपविंग) के 4 अंडे पाए गए हैं। सामान्यतः टिटहरी 2 या 3 अंडे देती है, जबकि 4 अंडों का समूह अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है।

स्थानीय ग्रामीणों के बीच लंबे समय से यह रोचक मान्यता प्रचलित है कि यदि टिटहरी के घोंसले में 2 से अधिक अंडे हों, तो अच्छी और लंबे समय तक वर्षा होने की संभावना रहती है। झिरिया क्षेत्र में 4 अंडों का पाया जाना स्थानीय लोगों और वन अमले के बीच अच्छी बारिश की उम्मीदों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। यद्यपि इस विश्वास का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, फिर भी सदियों से संचित लोकज्ञान और प्रकृति अवलोकन की समृद्ध परंपरा पर ग्रामीण अंचलों में आज भी भरोसा किया जाता है।

खुले पथरीले और कंकरीले भूभाग पर बिना पारंपरिक घोंसले के दिए गए ये अंडे प्रकृति की अद्भुत अनुकूलन क्षमता को दर्शाते हैं। अंडों का रंग और बनावट आसपास की मिट्टी एवं पत्थरों में इस प्रकार घुल-मिल जाते हैं कि उन्हें पहचान पाना कठिन हो जाता है, जिससे उन्हें प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। वन अधिकारियों के अनुसार, ऐसे पारंपरिक दावों का व्यवस्थित अभिलेखन और दीर्घकालीन अध्ययन भविष्य में रोचक निष्कर्ष दे सकता है।

दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में झिरियों के संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यों से इन क्षेत्रों में पक्षियों एवं अन्य जीवों की गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है। टिटहरी जैसे संवेदनशील पक्षियों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि प्राकृतिक आवास और जलस्रोत पुनः जीवंत हो रहे हैं।

 

Spread the love