July 13, 2026

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अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल; भारत पर कितना पड़ेगा असर?

अमेरिका- ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उछाल शुरू हो चुका है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 13 जुलाई 2026 को सुबह 7.28 बजे ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.15% की तेजी के बाद 79.17 डॉलर प्रति बैरल यानी लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच चुकी है। इसके एवं WTI क्रूड 4.16% की तेजी के बाद 74.407 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। मिडिल ईस्ट का यह तनाव जल्द ही समाप्त नहीं होता है तो इसका असर भारत में भी देखने को मिल सकता है।

मिडिल ईस्ट तनाव के कारण बढ़ रही कीमत
कच्चे तेल की कीमतों में आई यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रहे हमलों का कारण है।

  1. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज बंद करने का ऐलान किया, इसके बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही में तेजी आ गई। सप्लायर को डर सता रहा है कि फिर से कहीं यह मार्ग बंद ना हो जाए।
  2. रविवार को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चौथी एयर स्ट्राइक की। जो साइप्रस के ध्वज वाले जहाज पर ईरानी हमले के बाद की गई।
  3. अमेरिकी केंद्रीय कमान ने तेहरान की तरफ से किए गए और होर्मुज बंद करने के ऐलान को खारिज कर दिया है।
    अब ईरान का कहना है कि नए सिरे से बातचीत शुरू करने से पहले अमेरिका को होर्मूज से जुड़ी पहले की बातों को पूरा करना होगा।
  4. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।

भारत पर क्या होगा असर?
यदि यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर भारत पर फिर से देखने को मिल सकता है। जैसा कि इसके पहले फरवरी में शुरू हुए अमेरिका ईरान युद्ध के बाद देखने को मिला था। भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से अभी भी दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए मामले का हल निकालने की समझाइए दी जा रही है।यदि लंबे समय तक तनाव जारी रहता है तो कच्चे तेल के आयात के लिए भारत को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ेगी। जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि होने की आशंकाएं बढ़ जाती है और इसका असर महंगाई पर देखने को मिल सकता है।
इसके पहले भी जब लंबे समय तक मिडिल ईस्ट में तनाव जारी था तब भारत सहित कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ था। हालांकि अन्य देशों की तुलना में भारत ने ईंधन की कीमतों में ज्यादा बड़ी वृद्धि नहीं की। बावजूद इसके की भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियां भारी नुकसान का सामना कर रही है।

ग्लोबल मार्केट में सप्लाई चैन को सामान्य रखने के लिए यह अनिवार्य है कि पश्चिम एशिया का यह तनाव जल्द ही समाप्त हो जाए।

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