June 8, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

मिलावटखोरों पर सख्ती की तैयारी, हरियाणा में 55 करोड़ से बनेंगी 8 अत्याधुनिक फूड टेस्टिंग लैब

करनाल.

प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ जल्द ही बड़ा अभियान शुरू होगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने खाद्य जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत प्रदेश में आठ नई खाद्य पदार्थ जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।

साथ ही आधुनिक उपकरणों से लैस मोबाइल जांच प्रयोगशालाएं भी सड़कों पर उतरेंगी, जहां आम नागरिक मात्र 20 रुपये में अपने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करा सकेंगे। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नामित अधिकारी पृथ्वी सिंह ने विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के उपलक्ष्य में विशेष बातचीत की।

एनसीआर में 55 करोड़ से मजबूत होगा जांच तंत्र
वर्तमान में विभाग के पास सिर्फ दो प्रयोगशालाएं हैं। इसी वर्ष दो नई प्रयोगशालाएं और शुरू की जाएंगी। अगले पांच वर्षों में पूरे प्रदेश में स्वीकृत सभी प्रयोगशालाओं का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी (एनसीआर) में खाद्य जांच सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए 55 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इससे फरीदाबाद, गुरुग्राम और रोहतक में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है।

पांच अन्य जिलों को भी मिली मंजूरी
केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से नारनौल, हिसार, जींद, सिरसा और यमुनानगर में भी नई प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी। विभाग इन जिलों में भूमि की तलाश की जा रही है। भूमि उपलब्ध होते ही निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सबसे पहले हिसार में कार्य आरंभ किए जाने की योजना है। करनाल स्थित प्रयोगशाला को भी अत्याधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। इसके लिए करीब 25 करोड़ रुपये के आधुनिक उपकरण खरीदे जा रहे हैं। खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नई व्यवस्था के तहत प्रयोगशाला में सूक्ष्मजीव विज्ञान (माइक्रोबायोलाजी) अनुभाग स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा उच्च क्षमता वाली आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी, जो खाद्य पदार्थों में मौजूद अत्यंत सूक्ष्म स्तर की मिलावट का भी पता लगाने में सक्षम होंगी।

गांव-गांव पहुंचेगी जांच सुविधा
विभाग आम लोगों को सीधे इस अभियान से जोड़ेगा। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित मोबाइल खाद्य प्रयोगशालाएं तैयार की जा रही हैं। इन मोबाइल वैन के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। मोबाइल प्रयोगशालाओं के संचालन के बाद नागरिक अपने घरों में उपयोग होने वाले दूध, दाल, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों की मौके पर ही जांच करा सकेंगे। इसके लिए सिर्फ 20 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। जांच सुविधा लोगों तक पहुंचने से मिलावटखोरों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही खाद्य सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

जानिये सैंपल फेल होने का अर्थ
नामित अधिकारी पृथ्वी सिंह ने कहा कि प्रदेश में पांच वर्षों के दौरान फेल हुए 4607 सैंपलों का मतलब सीधे तौर पर जहर या जानलेवा मिलावट होना नहीं है। इनमें से अधिकतर सैंपल तकनीकी कमियों के कारण सब-स्टैंडर्ड (अवमानक) श्रेणी में आते हैं। उदाहरण के लिए, यदि दूध में निर्धारित फैट छह प्रतिशत की जगह 5.9 प्रतिशत मिलता है या पनीर में तय मानक से नमी ज्यादा पाई जाती है, तो वह फेल माना जाता है। मिलावट का यह औसत पूरे देश में लगभग समान है। सरकारी लैब में कुछ एडवांस टेस्टों जैसे फसलों पर होने वाले पेस्टिसाइड/केमिकल स्प्रे को पकड़ने की आधुनिक मशीनें नहीं हैं। भारी बजट खर्च करके, एक-एक सैंपल की प्रामाणिक जांच के लिए ₹30 हजार रुपये तक फीस देकर बड़ी निजी लैब से टेस्ट करवाते हैं।

Spread the love