विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में ओमान की खाड़ी में एक कॉमर्शियल जहाज पर अमेरिकी सैन्य हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया। बातचीत के बाद विदेश मंत्री ने वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ अमेरिकी सेना की घातक कार्रवाई को अनुचित बताया। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, ”आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई। मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों, जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे, पर भारत के कड़े विरोध को दोहराया।” उन्होंने कहा, “वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ इस तरह का घातक हमला उचित नहीं है।”
अमेरिकी राजदूत को किया गया था तलब
भारत ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को तलब किया था। इस दौरान उन्हें बताया था कि ओमान तट के निकट भारतीय चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी सेना के घातक हमले अस्वीकार्य हैं। इससे पहले बुधवार रात को वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ को भी तलब किया गया था।
3 नाविकों की हुई थी मौत
अमेरिकी सैन्य बलों ने पलाऊ के ध्वज वाले तेल टैंकर मैरीवेक्स पर आठ जून को हमला किया था। इस जहाज पर सवार 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इसके बाद 10 जून को अमेरिका ने पलाऊ के ही ध्वज वाले एक अन्य टैंकर सेटेबेलो पर हमला किया, जिस पर सवार 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मौत हो गई।
गुरुवार को भी हुआ था हमला
इसके अलावा, गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले टैंकर जलवीर पर भी गुरुवार को हमला हुआ था। इस जहाज पर 20 भारतीय नागरिक सवार थे। जलवीर पर हुए हमले के बाद भारत ने कहा कि इस हफ्ते ओमान के तट के पास भारतीय चालक दल वाले तीन वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी सेना ने हमला किया, जिसमें तीन नागरिकों की मौत हो गई।
भारत सरकार ने जताई चिंता
भारत की ओर से पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया गया था कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों को निशाना बनाया था। शुक्रवार को मीक्स को तलब किए जाने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों को ले जा रहे वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी नौसेना के लगातार हमलों को लेकर उनके सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। मंत्रालय ने कहा कि उसने एक बार फिर असैन्य जहाजों के खिलाफ जानलेवा और घातक बल के इस्तेमाल पर अपनी गहरी चिंता जताई है।

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