Udaan Desk. हरिद्वार (उत्तराखंड) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव ने जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर अपना रिएक्शन दिया. उन्होंने कहा कि देश सड़कों से नहीं, बल्कि संसद और संविधान से चलता है. रामदेव ने कहा कि शिक्षा मंत्री कौन होगा, इसका फैसला सड़क पर प्रदर्शन करने वाले लोग नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री और संसद करेंगे. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने आंदोलन के दौरान ‘ब्राह्मणवाद से आजादी’ और ‘आरएसएस से आजादी’ जैसे नारे लगाए.
रामदेव ने कहा कि अगर किसी ने आरएसएस से राष्ट्रवाद सीखा है तो इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि संविधान ब्राह्मणों, दलितों और सभी वर्गों को समान अधिकार देता है. ऐसे में किसी भी जाति या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना संविधान की भावना के खिलाफ है.
‘Gen Z ने जंतर-मंतर पर भारत को बदनाम किया’
बाबा रामदेव ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि Gen Z के कुछ युवाओं ने वहां भारत की छवि खराब करने का काम किया. उन्होंने कहा कि गाली-गलौज भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है. भारत की परंपरा बड़ों का सम्मान करने और गुरुजनों के बताए रास्ते पर चलने की रही है.
‘मतभेद हों तो संवैधानिक तरीके से दूर करें’
रामदेव ने कहा कि नया भारत समानता की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि अब बेटियां भी वेद-पुराण पढ़ रही हैं, यज्ञोपवीत धारण कर रही हैं और यज्ञ कर रही हैं. उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्म हो सकते हैं, लेकिन हमारे पूर्वज अलग नहीं हैं. सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ने का अधिकार है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मुद्दे पर असहमति है, तो उसे संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से दूर करने की कोशिश की जानी चाहिए.

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