Inspirational Success Story : जिंदगी में एक या दो बार फेल होने पर ही लोग हिम्मत हार जाते हैं और अपने सपनों को पीछे छोड़ देते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी जिद के आगे मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं. केरल की रहने वाली निसा उन्नीराजन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली UPSC परीक्षा में उन्हें एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे 6 बार असफलता का सामना करना पड़ा. लेकिन 40 साल की उम्र में, जब लोग करियर में ठहराव की सोचने लगते हैं, तब निसा ने सातवें प्रयास में इतिहास रच दिया. आइए जानते हैं उनकी इस प्रेरणादायक सफलता की पूरी कहानी…
सुनने की कमजोरी को बनाया अपनी ताकत
निसा की राह में सिर्फ पढ़ाई या समय की कमी ही रोड़ा नहीं थी, बल्कि उनकी सेहत भी एक बड़ी चुनौती थी. उन्हें सुनने में गंभीर समस्या थी, जिसे मेडिकल की भाषा में हियरिंग इम्पेयरमेंट कहा जाता है. आमतौर पर लोग ऐसी शारीरिक दिक्कतों को अपनी किस्मत मानकर समझौता कर लेते हैं, लेकिन निसा ने इसे कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया. उन्होंने उन जांबाज अफसरों की कहानियां पढ़ीं जिन्होंने अक्षमताओं को हराकर सफलता पाई थी. यहीं से उन्हें भरोसा मिला कि अगर दूसरे कर सकते हैं, तो वह भी कर सकती हैं.
मां की जिम्मेदारी, नौकरी का दबाव और रातों की पढ़ाई
निसा की असल चुनौती उनकी रोजमर्रा की जिंदगी थी. वह दो बेटियों की मां थी, जिन पर पूरे घर की जिम्मेदारी थी. इसके साथ ही वह अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए एक प्रोफेशनल नौकरी भी करती थीं. उनकी सुबह बच्चों को संभालने, घर के काम करने और ऑफिस भागने में बीतती थी. पूरा दिन ऑफिस की थकावट के बाद जब रात को सब सो जाते थे, तब निसा की असली तपस्या शुरू होती थी. रात की खामोशी में वह अपनी किताबों के साथ घंटों बैठती थीं. यह सिलसिला किसी एक या दो दिन का नहीं, बल्कि सालों का था.
जब टूटने लगा हौसला, तब परिवार बना ढाल
लगातार मिलती असफलताओं के बाद कोई भी इंसान गहरे तनाव में जा सकता है. निसा के साथ भी ऐसा दौर आया, लेकिन इस लंबे और थका देने वाले सफर में उनका परिवार उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा. उनके पति अरुण और पूरे परिवार ने हर मोड़ पर उनका साथ दिया. निसा की पढ़ाई के लिए घर के काम और जिम्मेदारियों को आपस में बांटा गया ताकि उन पर मानसिक दबाव कम हो सके. जब भी निसा का हौसला डगमगाया, परिवार ने उन्हें संभाला. निसा हमेशा कहती हैं कि यह कामयाबी सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की है.
सातवें प्रयास ने बदल दी किस्मत, 40 की उम्र में रचा इतिहास
हर असफलता के बाद निसा ने अपनी कमियों को सुधारा और नए जोश के साथ अगली परीक्षा की तैयारी में जुट गईं. आखिरकार उनकी मेहनत और कभी न हार मानने वाले जज्बे का फल मिला. साल 2024 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. अपने सातवें प्रयास में निसा ने ऑल इंडिया 1000वीं रैंक हासिल की. 40 साल की उम्र में जब उन्होंने इस लिस्ट में अपना नाम देखा, तो सालों का दर्द और संघर्ष एक पल में खुशी में बदल गया.
सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती
आज निसा उन्नीराजन एक IAS अफसर के रूप में देश की सेवा कर रही हैं. उनकी यह सफलता हमें सिखाती है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है और सपनों को पूरा करने की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती. अगर आपके पास अपनी मंजिल को पाने की सच्ची जिद, अनुशासन और खुद पर अटूट भरोसा है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती. निसा की कहानी आज देशभर के लाखों एस्पिरेंट्स, खासकर उन महिलाओं के लिए उम्मीद की एक नई मिसाल बन चुकी है जो पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं.

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