August 6, 2026

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विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा से पास हुआ टैक्स बिल

नईदिल्ली। लोकसभा ने विपक्ष के हंगामे के बीच ‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026’ को चर्चा के बिना पारित कर दिया। राम मंदिर चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों के शोर-शराबे के बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 सदन में चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया।

विधेयक का उद्देश्य ”विश्वसनीय नीतिगत व्यवस्था और प्रक्रियागत निश्चितता” उपलब्ध कराकर अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। विपक्ष के हंगामे के कारण विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी। सदन ने इस संबंध में जून में लागू अध्यादेश को अस्वीकृत करने के आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन के सांविधिक संकल्प को खारिज कर दिया। सभा ने के. राधाकृष्णन, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और प्रेमचंद्रन समेत कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को भी खारिज कर दिया। इसके बाद ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया गया।

इस विधेयक में ‘फंड मैनेजरों’ के भारत आने को आसान बनाने का प्रस्ताव किया गया है, जबकि विदेशी निवेश को भारत में कारोबार में लगा पैसा नहीं माना जाएगा। इसका उद्देश्य उन विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट को 2040-41 तक बढ़ाना भी है, जो किसी भारतीय फैक्टरी को मशीनरी और उपकरण उपलब्ध कराती हैं और वो फैक्टरी अनुबंध विनिर्माण के तहत उनकी ओर से खास इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं बनाती है। विधेयक में उल्लेख की गई खास इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके मुख्य पार्ट्स और एक्सेसरीज शामिल हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्टरी को पुर्जों की आपूर्ति में मदद करने के लिए, यह विधेयक उन विदेशी कंपनियों को 2040-41 तक 15 साल के लिए कर में छूट देने का प्रस्ताव करता है, जो भारत में अनुबंध विनिर्माता को आपूर्ति करने के लिए ‘कस्टम्स वेयरहाउस’ में पुर्जे रखती हैं। विधेयक में उन विदेशी ‘क्लाउड’ कंपनियों के लिए मंज़ूरी की जरूरत को भी खत्म किया गया है जो भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करती हैं। इसमें यह भी प्रस्ताव किया गया है कि भारतीय डेटा सेंटर को सिर्फ सीधे मालिकाना हक के तहत संचालित करने के बजाय पट्टे के आधार पर संचालित किया जाए।

विधेयक में संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए और आयकर अधिनियम की धारा 269एसयू में आवश्यक बदलाव करने का प्रस्ताव किया गया है। मौजूदा प्रावधान के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले बड़े व्यवसायों के लिए ‘रुपे’ डेबिट कार्ड और भीम-यूपीआई क्यूआर कोड सहित कुछ निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भुगतान स्वीकार करना अनिवार्य है।

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