June 18, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

संकट में उद्धव की ‘शिवसेना’ : संसदीय दल की बैठक में नहीं पहुंचे 6 बागी सांसद

  • अलग गुट बनाकर लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपा

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी फूट पड़ गई है। दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में केवल 3 सांसद शामिल हुए, जबकि 6 सांसदों ने दूरी बनाए रखी। बागियों ने अलग गुट बनाकर लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है, जिसके बाद पार्टी ने कार्रवाई की चेतावनी दी है।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी टूट लगभग तय मानी जा रही है। गुरुवार को नई दिल्ली में बुलाई गई पार्टी के संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई। इस बैठक में पार्टी के कुल सांसदों में से केवल 3 सांसद ही उपस्थित हुए, जबकि 6 सांसदों ने इस बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली। इस घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे खेमे के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है, क्योंकि यह स्पष्ट संकेत है कि पार्टी का एक बड़ा हिस्सा अब उनके नेतृत्व से अलग होने की राह पर है।

बैठक में कौन आया और कौन रहा नदारद
संसद भवन स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित इस आपातकालीन बैठक में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजा वाजे ही मौजूद रहे। दूसरी ओर, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 6 सांसदों ने इस बैठक का बहिष्कार किया। अनुपस्थित रहने वाले सांसदों में संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव के नाम शामिल हैं। इन 6 सांसदों की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर मचे घमासान को सार्वजनिक कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि इन बागियों ने अब अपना एक अलग संसदीय गुट तैयार कर लिया है और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व को चुनौती देने की तैयारी पूरी कर ली है।

लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा पत्र
खबरों के मुताबिक, इन 6 बागी सांसदों ने न केवल बैठक से दूरी बनाई, बल्कि उन्होंने अपना अलग संसदीय गुट बनाने से संबंधित एक औपचारिक पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी सौंप दिया है। सूत्रों का कहना है कि इन सांसदों ने बुधवार सुबह ही लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की थी और उन्हें अपने फैसले से अवगत कराया था। यह कदम इस बात की पुष्टि करता है कि बागी सांसद अब कानूनी और तकनीकी रूप से पार्टी से अलग होने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं और वे 20 जून को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात करेंगे, जिसके बाद वे सार्वजनिक रूप से यह खुलासा करेंगे कि उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला क्यों किया और स्पीकर के साथ उनकी क्या बातचीत हुई।

व्हिप का उल्लंघन और कानूनी पेच
पार्टी नेतृत्व ने इस बैठक के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया था और सभी सांसदों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था और संजय राउत ने बताया कि यह व्हिप सभी सांसदों को उनके घर पर, ईमेल के जरिए और व्हाट्सएप पर भेजा गया था। हालांकि, जानकारों का कहना है कि दल-बदल विरोधी कानून यानी दसवीं अनुसूची के तहत व्हिप केवल सदन की विधायी कार्यवाही के लिए ही मान्य होता है। सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या के अनुसार, व्हिप का महत्व सदन के भीतर मतदान या मतदान से विरत रहने तक सीमित है और इसे पार्टी की आंतरिक या संगठनात्मक बैठकों पर अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जा सकता। इसी कानूनी बारीकी का फायदा बागी सांसद उठा सकते हैं।

पार्टी नेतृत्व के कड़े तेवर
सांसदों की इस बगावत पर अरविंद सावंत और संजय राउत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अरविंद सावंत ने स्पष्ट किया कि व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से चर्चा के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बागियों को सबक सिखाना जरूरी है और सावंत ने शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पाला बदलने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कड़े रुख की वकालत की थी। संजय राउत ने भी दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए यह बैठक बुलाई गई थी और व्हिप का उल्लंघन करने वालों को इसके परिणाम भुगतने होंगे।

आगे की रणनीति और शिंदे से मुलाकात
अब सबकी नजरें 20 जून पर टिकी हैं, जब ये बागी सांसद एकनाथ शिंदे से मुलाकात करेंगे। इस बैठक के बाद बागी सांसद उस पत्र को भी सार्वजनिक कर सकते हैं जो उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा है। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि शिवसेना (यूबीटी) के भीतर का असंतोष अब एक औपचारिक विभाजन का रूप ले चुका है और यदि ये 6 सांसद अलग गुट बनाने में सफल रहते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए संसद में अपनी ताकत बनाए रखने के लिहाज से एक बहुत बड़ा झटका होगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इस मामले में क्या फैसला लेते हैं और उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को बचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

Spread the love