भारत के आधिकारिक आर्थिक आंकड़े जो अभी कई डेटाबेस और सरकारी एजेंसियों में फैले होते हैं, उन्हें जल्द ही एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे नीति निर्माताओं, शोधार्थियों और कारोबारियों तक डेटा की पहुंच सुगम होगी और उनके लिए योजना बनाना तथा फैसला लेना आसान हो जाएगा।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय जल्द ही देश के सभी आर्थिक आंकड़ों को अपनी तरह के अनूठे साझा डेटा प्लेटफॉर्म (सीडीपी) पर ला सकता है, जिसमें इसे आधिकारिक आंकड़ों के लिए एक समर्पित लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) के रूप में विकसित करने की योजना है। घटनाक्रम से अवगत कई सूत्रों ने यह जानकारी दी।
साझा डेटा प्लेटफॉर्म ऐसा साझा डिजिटल तंत्र है जो अलग-अलग स्रोतों से आंकड़ों को एक जगह इकट्ठा करता है ताकि वे आसानी से उपलब्ध हो सकें। इस तरह के एकीकरण से मंत्रालयों, विभागों और डेटासेट के बीच डेटा के बिखराव की समस्या खत्म हो जाएगी और उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग पोर्टल, पीडीएफ और स्प्रेडशीट्स खंगालने की जरूरत नहीं होगी।
इस योजना के अमली जामा पहनाए जाने के साथ ही भारत अपने बड़े बहुभाषी आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों के लिए एक समर्पित एलएलएम वाला पहला देश बन जाएगा। एलएलएम एक उन्नत आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) प्रणाली है जिसे इंसानों जैसी भाषा को समझने और बनाने के लिए बड़ी मात्रा में टेक्स्ट पर तैयार और प्रशिक्षित किया जाता है।
भारत में यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ब्रिटेन, नीदरलैंड, कनाडा, फिनलैंड और सिंगापुर सहित कई देश आर्थिक आंकड़ों के लिए समर्पित एलएलएम को तैयार करने के बजाय एलएलएम और आधिकारिक डेटाबेस से जानकारी निकालने की तकनीक के संयोजन का उपयोग कर रहे हैं।
हालांकि सरकार ने अभी तक खुलासा नहीं किया है कि स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (एसएलएम) पर विचार किया जा रहा है या फिर उन्नत तर्क, बहुभाषी समर्थन और व्यापक विश्लेषणात्मक क्षमताओं एलएलएम पर।
सूत्रों के अनुसार चेन्नई की आईटी सेवा और डिजिटल ट्रांफॉर्मेशन फर्म बहवान साइबरटेक (बीसीटी) को सांख्यिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय लेखा प्रभाग के लिए साझा डेटा प्लेटफॉर्म तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। यह एलएलएम की दिशा में पहला कदम होगा।
राष्ट्रीय लेखा प्रभाग सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), राष्ट्रीय आय, बचत और पूंजी निर्माण सहित प्रमुख राष्ट्रीय आर्थिक संकेतकों को संकलित करता है। इसके लिए यह मंत्रालयों, राज्य सरकारों, नियामकों और सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों से प्राप्त व्यापक डेटासेट पर निर्भर है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन के महानिदेशक (केंद्रीय सांख्यिकी) एन के संतोषी ने कहा, ‘हम वर्तमान में जीडीपी गणना के लिए आवश्यक डेटा स्रोतों को पीडीएफ और एक्सेल शीट के रूप में जारी करते हैं। इस पहल का उद्देश्य इन स्रोतों को एक ही मंच पर एकीकृत करना है, जिससे जीडीपी गणना आसान हो जाएगी।’ साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में इस प्लेटफॉर्म को एलएलएम में विकसित करने का विचार है।
बीसीटी के वैश्विक सेवा कारोबार के मुख्य कार्याधिकारी वी श्रीनिवासन ने कहा, ‘इसका उद्देश्य देश के लिए आधुनिक डेटा प्रबंधन और सांख्यिकी प्लेटफॉर्म बनाना है। पहले चरण में डेटा छांटने, उसे व्यवस्थित करने और केंद्रीकृत डेटा प्लेटफॉर्म विकसित करने का काम जाएगा।’ श्रीनिवासन ने कहा कि 18 महीनों में हम भविष्य के एआई ऐप्लीकेशन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद करेंगे।’
बीसीटी का नया प्लेटफॉर्म भारत के आर्थिक आंकड़ों के प्रबंधन में व्यापक बदलाव लाने के लिए बनाया जा रहा है। इसके तहत राष्ट्रीय लेखा प्रभाग की 18 इकाइयां और सैकड़ों अलग-अलग डेटा स्रोतों से डेटा को एक साथ लाकर एक भरोसेमंद और एकीकृत डेटा इकोसिस्टम बनाया जाएगा। बीसीटी का यह समाधान डेटा एकीकरण को स्वचालित करेगा, डेटा की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा और केंद्रीकृत रिपॉजिटरी बनाएगा जो जानकारी का एकमात्र विश्वसनीय स्रोत होगा।
कंपनी पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान के सांख्यिकी विभागों के साथ काम कर चुकी है लेकिन भारत का सांख्यिकी विभाग बहुत बड़े स्तर पर काम करता है। साझा डेटा प्लेटफॉर्म को आधुनिक डेटा लेकहाउस वास्तुकला पर बनाया जाएगा।
यह प्लेटफॉर्म एआई आधारित विश्लेषण और रिपोर्टिंग क्षमताएं प्रदान करेगा, जिससे नीति निर्माताओं को आर्थिक रुझानों की अधिक प्रभावी ढंग से निगरानी करने, निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने और परिचालन दक्षता में सुधार करने में मदद मिलेगी। यह प्लेटफॉर्म सांख्यिकी मंत्रालय के व्यापक आधुनिकीकरण एजेंडा और सरकारी एजेंसियों के बीच भविष्य में डेटा साझेदारी की जरूरतों में भी मदद करेगा।

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