देश की पहली निजी गोल्ड माइन जोन्नागिरी खदान का सोना बाजारों में बिकने लगा है। अभी फिलहाल इसकी कीमत पर कोई छूट नहीं मिली है। 50 ग्राम 100 ग्राम और 500 ग्राम गोल्ड के बिस्कुट बाजार में सोने के भाव पर ही बिक रहे हैं।
बता दें कि, आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले की जोन्नागिरी गोल्ड माइन स्वतंत्रता के बाद की भारत की पहली निजी सोने की खदान है। जहां से प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। इस खदान से निकला सोना बाजारों में भी पहुंच गया है। भारत में बने सोने की डिमांड काफी ज्यादा है इसलिए यह बाजार में जाते ही बिक गया।
ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल आ सकते हैं कि क्या इस सोने की कीमत बाजार में दूसरे देशों से आयात किए गए सोने से कम है? अभी यह सोना केवल 50 ग्राम 100 ग्राम और 500 ग्राम के वजन वाले बिस्कुट के रूप में मिल रहा है। जिसका भाव बाजार में करंट रेट के हिसाब से ही है।
जोन्नागिरी खदान के गोल्ड बिस्कुट की डिमांड क्यों ज्यादा
भारत में ज्यादातर दूसरे देशों से आयात किए गए सोने का इस्तेमाल होता है। ऐसे में जब जोन्नागिरी खदान से निकला सोना बाजार में आया तो इसकी डिमांड में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। यह 99.9% शुद्ध है, जिसके बिस्कुट पर जोन्नागिरी गोल्ड माइन लिखा है। इतना ही नहीं 500 ग्राम वाले बिस्किट पर तो आंध्र प्रदेश का नक्शा भी अंकित है। इसीलिए इनकी डिमांड भी बढ़ती जा रही है।
अभी तीन अलग अलग वजन में बिक रहा है यह सोना
केवल 50 ग्राम 100 ग्राम और 500 ग्राम के वजन वाले बिस्कुट के रूप में मिल रहा है। जिसका भाव बाजार में करंट रेट के हिसाब से ही है।मांग अधिक होने के कारण अभी केवल यह बिस्किट कुरनूल शहर के वेंकटचलपति सर्राफा बाजार में ही मिल रहे हैं। इनकी डिमांड इतनी ज्यादा है कि छोटे साइज वाले गोल्ड के बिस्किट तो आते ही बिक गए।
क्या सस्ता मिलेगा सोना?
अभी तो इस निजी सोने की खदान से निकाला गया गोल्ड भी मार्केट रेट के हिसाब से ही मिल रहा है। इस पर भी जीएसटी और अन्य टैक्स लगाए जा रहे हैं। आगे चलकर भी कीमतों में इसलिए अंतर नहीं देखा जा सकता है क्योंकि दूसरे देशों से मांगे जाने वाले सोने पर आयात शुल्क का भुगतान करते हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर होने वाले उत्पादन में भी कई शुल्क लगती है।
इसके अलावा कमोडिटी बाजार की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही तय होती है उसी के आधार पर बिक्री होती है। इस खदान की शुरुआत से भारत में सोने के आयात पर मामूली ही सही लेकिन कुछ अंतर देखने को मिल सकता है। वैसे भारत में सोने की डिमांड काफी ज्यादा है। क्योंकि यहां केवल निवेश के उद्देश्य से ही नहीं बल्कि शादी-ब्याह, तीज-त्योहार और ऐसे कई अवसरों पर सोना चांदी खरीदने की परंपराएं हैं।

Related Posts
EV बाजार में TVS का दबदबा : iQube ने पार किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा
एअर इंडिया की ‘ईज़ी कनेक्ट’ फ़्लाइट सेवा वाराणसी एयरपोर्ट से हुई लांच
अदाणी ग्रुप को भारत के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा, हार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर में किया बड़ा निवेश