जापान में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार सुबह एक बार फिर देश का उत्तरी हिस्सा शक्तिशाली भूकंप के झटकों से दहल उठा। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.1 मापी गई है।
पिछले महज चार दिनों के भीतर जापान में आया यह तीसरा बड़ा और शक्तिशाली भूकंप है, जिसने वैज्ञानिकों और सरकार की चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस ताजा भूकंप के बाद फिलहाल कोई सुनामी अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
रविवार सुबह इवाते प्रांत में आया
भूकंप जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, रविवार को आए इस भूकंप का केंद्र इवाते प्रांत का तटीय इलाका था। स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:21 बजे जब लोग गहरी नींद में थे, तभी धरती तेज झटकों के साथ कांपने लगी। भूकंप का केंद्र जमीन से 40 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
रिपोर्टों के अनुसार, आमोरी प्रांत के हाचिनोहे शहर में भूकंप की तीव्रता काफी अधिक महसूस की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना में किसी के हताहत होने या जान-माल के बड़े नुकसान की खबर नहीं है।
4 दिन में 3 बड़े भूकंपों से दहशत
जापान में पिछले 96 घंटों के दौरान भूकंपों का जो सिलसिला शुरू हुआ है, उसने 2011 की भयावह यादें ताजा कर दी हैं।
– गुरुवार (25 जून) को उत्तरी जापान के इवाते प्रांत में 7.2 तीव्रता का महाविनाशकारी भूकंप आया था।
– शुक्रवार (26 जून) की रात को टोक्यो और माउंट फूजी के पास यामानाशी प्रांत में 5.6 तीव्रता का झटका महसूस किया गया।
– रविवार (28 जून) सुबह एक बार फिर इवाते प्रांत में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया।
शुक्रवार के भूकंप ने मचाई थी तबाही
भले ही रविवार के भूकंप में नुकसान की खबर कम है, लेकिन शुक्रवार रात आए भूकंप ने जापान के कई शहरों को प्रभावित किया था। यामानाशी और कनागावा प्रांतों में कम से कम 6 लोग घायल हुए थे।
कनागावा के नाकाई शहर में भारी भूस्खलन हुआ, जबकि फुजियोशिदा में कंक्रीट की दीवारें ढह गई थीं। इस आपदा के कारण करीब 2860 घरों की बिजली गुल हो गई थी और बुलेट ट्रेन सहित कई रेल सेवाओं को घंटों रोकना पड़ा था।
भूकंप के साथ समुद्री तूफान का खतरा
जापान के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। मौसम विभाग के प्रमुख अयाताका एबिता ने चेतावनी दी है कि अगले दो-तीन दिनों में एक और बड़े भूकंप की 10% से 20% आशंका बनी हुई है।
इसके साथ ही, जापान के मुख्य द्वीप होंशू की तरफ दो ट्रॉपिकल तूफान तेजी से बढ़ रहे हैं। भारी बारिश और खराब मौसम के कारण भूकंप से प्रभावित कमजोर इलाकों में बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड का खतरा पैदा हो गया है।

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