July 13, 2026

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राम मंदिर चढ़ावा केस में अब मनी ट्रेल खंगालेगी पुलिस, 50 खाते रडार पर

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि कथित रूप से गायब हुई रकम आखिर कहां-कहां पहुंची और उसका इस्तेमाल किस काम में किया गया। पैसे का पूरा रास्ता पता लगाने के लिए पुलिस ने आयकर विभाग से भी मदद मांगी है।

50 बैंक खातों की हो रही जांच
पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों और उनके परिवार के लोगों से जुड़े करीब 50 बैंक खातों की जांच शुरू की है। इन खातों में साल 2022 से अब तक हुए लेन-देन को देखा जा रहा है।

जांच अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि रकम सीधे आरोपियों के खातों में रखी गई या रिश्तेदारों और दूसरे लोगों के खातों के जरिए इधर-उधर भेजी गई। इसके लिए बैंक खातों में जमा नकदी बड़ी निकासी और एक खाते से दूसरे खाते में हुए ट्रांसफर की जानकारी जुटाई जा रही है।

बैंक स्टेटमेंट और KYC रिकॉर्ड मांगे
पुलिस ने बैंकों से खातों के पूरे स्टेटमेंट KYC रिकॉर्ड नॉमिनी की जानकारी और लेन-देन का इतिहास मांगा है। जांच टीम यह भी देख रही है कि किसी खाते में अचानक बड़ी रकम जमा हुई या बिना साफ वजह के पैसे निकाले गए।

आरोपियों और उनके करीबी लोगों के नाम पर हुए निवेश की भी जांच की जा रही है। इसका मकसद ऐसी संपत्ति या रकम का पता लगाना है जिसका सही हिसाब उपलब्ध नहीं है।

शेयर बाजार और प्रॉपर्टी में निवेश की जांच
आयकर विभाग की मदद से यह पता लगाया जाएगा कि कथित रकम शेयर बाजार म्यूचुअल फंड फिक्स्ड इनकम योजनाओं या रियल एस्टेट में लगाई गई या नहीं।

जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि कई छोटे लेन-देन के जरिए रकम का असली स्रोत छिपाने की कोशिश तो नहीं की गई। जांच की अवधि में खरीदी गई चल और अचल संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

रिश्तेदारों और दूसरे लोगों की भूमिका पर नजर
पुलिस को शक है कि कथित गबन की रकम केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रही होगी। इसलिए उन रिश्तेदारों और सहयोगियों की भूमिका भी जांची जा रही है जिनके खातों या नाम पर पैसा और संपत्ति रखी गई हो सकती है।

संपत्ति जब्त करने में मिल सकती है मदद
वित्तीय जांच से रकम के पूरे लेन-देन का पता लगाने और कथित रूप से हासिल पैसे का हिसाब तैयार करने में मदद मिलेगी। जांच में दूसरे लोगों की भूमिका सामने आने पर नई गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

अधिकारियों के मुताबिक बैंक रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई संपत्ति की रिकवरी और जब्ती से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।

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