September 11, 2026

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SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त : चुनाव आयोग तय नहीं कर सकता नागरिकता

पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करना चुनाव आयोग (ECI) का संवैधानिक अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग का अधिकार केवल मतदाता सूची के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और पुनरीक्षण तक सीमित है।

नागरिकता खत्म नहीं होती
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाता या हटा दिया जाता है, तो इससे उसकी नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं हो जाती।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी सक्षम प्राधिकरण या ट्रिब्यूनल की कार्रवाई के बाद नागरिकता से जुड़ा प्रश्न उत्पन्न होता है, तो चुनाव आयोग को इस संबंध में मामला संबंधित मंत्रालय के पास भेजना होगा। नागरिकता का अंतिम निर्णय चुनाव आयोग नहीं कर सकता।

25 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी उपलब्ध कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त तय की है।

SIR को लेकर जारी है राजनीतिक विवाद
पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर पहले से कई याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। कुछ मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि कुछ पर अभी सुनवाई जारी है। राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद भी तेज है। सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और शुद्ध बनाना है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन, त्रुटिरहित और प्रमाणिक बनाना होता है। आमतौर पर चुनाव आयोग हर वर्ष मतदाता सूची का संक्षिप्त पुनरीक्षण करता है, लेकिन जब किसी राज्य या क्षेत्र में व्यापक जांच की जरूरत महसूस होती है, तब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू किया जाता है।

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