उड़ान डेस्क। जेनेरिक दवाओं पर 200% का टैरिफ लगाने की अमेरिकी प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप की घोषणा ने दुनिया भर की फार्मास्यूटिकल्स कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। 2 साल की अवधि समाप्त होने के बाद यह 100% और फिर 200% का टैरिफ दूसरे देशों से भेजी जा रही जेनेरिक दावों पर अमेरिका में लगाया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब इस बात की भी चर्चा हो रही है कि अमेरिका इसी सप्ताह कई देशों पर 10% नए टैरिफ लगाने की घोषणा कर सकता है। रूस से तेल खरीदने पर भी 100% टैरिफ लगाने की बात कही जा रही है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में कई देशों पर 10% के नए टैरिफ लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके पहले भी ट्रंप कई बार यह कह चुके हैं कि कुछ देशों में उनके यहां के सामानों पर भारी टैरिफ लगाकर उन्हें लूटा जाता है इसीलिए अमेरिका अब ऐसे देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाएगा। आपको बता दें कि ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट भी ऐतराज जता चुका है। पहले जब ट्रंप ने कई देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाया था तब कई देशों ने अमेरिका के खिलाफ भी जवाबी टैरिफ लगाया था।
क्या है उद्देश्य?
अमेरिका का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा कंपनियां वहां जाकर प्रोडक्शन शुरू करें। यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ऐसे भारी भरकम टैरिफ का ऐलान कर रहे हो इसके पहले भी वह कई बार दुनिया को ऐसे टैरिफ ऐलान से चौक चुके हैं।
अब जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ का प्लान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किए गए पोस्ट के अनुसार:
1 अगस्त 2026 से शुरू होने वाले 2 साल तक अमेरिका में भेजी जाने वाली सभी जेनेरिक दवाइययों पर 0% टैरिफ लगाया जाएगा।
1 साल की अवधि खत्म होने के बाद अगले 1 साल तक 100% टैरिफ वसूला जाएगा।
इसके बाद 100% टैरिफ वाली 1 साल की अवधि की समाप्ति के बाद जेनेरिक दवाओं पर 200% टैरिफ लगेगा।
जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ़ क्यों लगा रहा अमेरिका?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह भी बताया कि वे भारी भरकम टैरिफ लगाने का प्लान क्यों बना रहे हैं। उनका कहना है कि जेनेरिक फार्मास्यूटिकल उत्पादन अमेरिका में लौट आए। कंपनियों को अमेरिका में अपना प्लांट लगाने के लिए समय दिया जा रहा है यदि वे अमेरिका नहीं आती है तो आने वाले समय में उन पर शुल्क लगाया जाएगा।
पहले जैसे ही बनी रहेगी नीति
ट्रंप ने यह भी कहा कि पेटेंटेड, ब्रांडेड और इन्नोवेटिव दवाओं की जो नीति है वह पहले के जैसे ही बनी रहेगी। अमेरिका चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा विदेशी कंपनियां वहां जाकर उत्पादन शुरू करें। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में बिकने वाली दवाओं में लगभग 90% से ज्यादा जेनेरिक दवाई शामिल हैं।
ट्रंप की टैरिफ़ नीतियों के कारण मच चुका है बवाल
इसके पहले सितंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेटेंटेड, ब्रांडेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था लेकिन उसे समय टैरिफ के फैसले में जेनेरिक दवाओं को अलग रखा था। ट्रंप जब से दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तब से उनकी टैरिफ़ नीतियां दुनिया भर में काफी बवाल मचा चुकी है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अमेरिका को बड़े तौर पर जेनेरिक दवाओ की सप्लाई करता है। अमेरिका में जाने वाली जेनेरिक दावों में लगभग 40 से 50% हिस्सा भारतीय कंपनियों के द्वारा भेजा जाता है। ऐसे में अभी तो भारतीय ड्रग मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के पास 2 साल का समय है लेकिन लंबी अवधि में 200% के टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियों को भी अमेरिका में जाकर उत्पादन शुरू करना पड़ सकता है।

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