July 25, 2026

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पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए MP में चार विशेष त्वरित अदालतें गठित

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक और उनसे जुड़ी अनियमितताओं के मामलों की सुनवाई के लिए चार विशेष त्वरित अदालतें गठित की हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि आरोपपत्र दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर इन मामलों का निस्तारण करने का हरसंभव प्रयास किया जाए।

यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) समेत प्रश्नपत्र लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का आश्वासन दिया है। मई में कथित नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के बाद छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने व्यापक विरोध प्रदर्शन करते हुए अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की थी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने शुक्रवार रात जारी आदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के जिला एवं अपर सत्र न्यायालयों को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024’ तथा उससे संबंधित अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष त्वरित अदालत के रूप में अधिसूचित किया।

मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले की थी घोषणा
इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में प्रश्नपत्र लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई, शीघ्र न्याय और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए विशेष त्वरित अदालतें स्थापित करने की घोषणा की थी।

सरकारी बयान के अनुसार, भोपाल में 18वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण पटेल, ग्वालियर में आठवें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड, जबलपुर में 27वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार सेहलाम तथा इंदौर में 26वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. शुभ्रा सिंह को इन अदालतों के लिए नामित किया गया है।

लोक परीक्षा अधिनियम और बीएनएस से जुड़े मामलों की भी होगी सुनवाई
सरकारी बयान के अनुसार, ये विशेष त्वरित अदालतें ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024’ के तहत दंडनीय अपराधों के अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज मामलों तथा राज्य या केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित और संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा जांच किए गए अन्य मामलों की भी सुनवाई करेंगी।

प्रत्येक विशेष त्वरित अदालत का अधिकार क्षेत्र उसके मुख्यालय से संबद्ध निर्धारित जिलों तक होगा। उच्च न्यायालय ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि नामित अदालतें आरोपपत्र दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर निर्णय सुनाने का हरसंभव प्रयास करें। सरकार का कहना है कि इन अदालतों की स्थापना से सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अपराधों के मामलों में अभियोजन प्रक्रिया में तेजी आएगी और शीघ्र न्याय सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

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